उ. प्र. परीक्षा मामले में उच्च न्यायालय के आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय की रोक
उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के 30 अगस्त के फैसले पर अस्थाई रोक लगा दी।
राज्य सरकार की याचिका में कहा गया था कि उच्च न्यायालय के आदेश से न केवल उस वर्ष की राज्य सिविल सेवा परीक्षा महत्वहीन हो गई है बल्कि राज्य में अन्य नौकरियों के लिए हुई परीक्षओं के परिणामों की वैधानिकता पर भी संदेह पैदा हो गया।
धनंजय सिंह और अन्य की याचिका के आधार पर उच्च न्यायालय की अमिताव लाला और उमानाथ सिंह की खंडपीठ ने परिणाम निरस्त करने और एक महीने के भीतर नई परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया था।
उच्च न्यायालय के निर्णय पर रोक लगाने वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ में न्यायाधीश पी. सथासिवम और बी.एस.चौहान भी शामिल हैं। पीठ ने याचिकाकर्ताधनंजय और अन्य से राज्य सरकार की याचिका का जवाब चार सप्ताह के भीतर दाखिल करने को कहा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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