केरल नौका दुर्घटना में मृतकों की संख्या 42 हुई (लीड-2)
ईडुकी जिले के मुल्लपेरियार बांध जलाशय में यह हादसा बुधवार शाम 5.15 बजे हुआ था जब 76 पर्यटकों को ले जा रही एक नौका पेरियार वन्यजीव अभयारण्य में पलट गई थी। भारतीय नौसेना की 24 सदस्यीय टीम ने गुरुवार को मौके पर पहुंचकर शवों की तलाश शुरू कर दी थी।
दुर्घटना स्थल पर नियंत्रण कक्ष के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "हमारे रिकार्ड के अनुसार दिल्ली के 12, पश्चिम बंगाल के पांच, आंध्र प्रदेश के चार, कर्नाटक के तीन और मुंबई के एक व्यक्ति की मौत हुई है। पांच शवों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। उन्हें पहचानने की कोशिश की जा रही है।"
अधिकारियों ने बताया कि करीब एक दर्जन लोगों के शवों को सड़क के रास्ते तमिलनाडु ले जाया गया है और गुरुवार की शाम दो शवों को हैदराबाद ले जाया गया है।
एर्नाकुलम के जिला अधिकारी एम.बीना ने कहा, "दुर्घटनास्थल से शवों के आने में हो रही देरी की वजह से आज शवों को हवाई मार्ग से नहीं भेजा जा सका। हालांकि हमने सारे प्रबंध कर रखे हैं और हवाई मार्ग से शवों को लाने की सुविधा शुक्रवार से बहाल हो जाएगी।"
इसी बीच स्थानीय सांसद पी.टी.थॉमस ने जानकारी दी है कि नौका दुर्घटना के दौरान सभी विदेशी पर्यटक सही सलामत रहे।
इडुकी लोकसभा क्षेत्र के सांसद पी.टी. थॉमस ने आईएएनएस को बताया, "नौका में चार विदेशी सवार थे जिनमें दो औरतें और दो बच्चे थे। सभी दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन शहर से हैं। मैं बुधवार रात को कुमीली के केंद्रीय अस्पताल में उनसे मिला था। वे सही सलामत हैं।"
उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के रहने वाले विदेशी पर्यटक केरल की संत माता अमृतानंदमयी के भक्त हैं।
मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन ने अपने आवास पर संवाददाताओं को बताया कि शवों को भिजवाने तथा बचाए गए पर्यटकों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि घटना की जांच केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराने का फैसला किया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केरल के थेक्कडी में हुई नौका दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
सोनिया गांधी ने एक संदेश में कहा ,"मैं थेक्कडी में हुई नौका दुर्घटना में निर्दोष लोगों की मौत के बाद काफी दुखी हूं।"
इस नौका दुर्घटना में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति उन्होंने सहानुभूति जताई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को कारगर कदम उठाना चाहिए जिससे इस तरह की दुर्घटना आगे कभी नहीं होने पाए।
उधर, राज्य में वर्ष 2002 में इसी प्रकार के एक हादसे की जांच के लिए गठित जांच आयोग की अध्यक्षता करने वाले न्यायाधीश के. नारायण कुरूप ने कहा है कि ऐसे हादसे से बचा जा सकता था यदि राज्य सरकार पहले से कुछ कदम उठाती।
कुरूप ने राज्य में वर्ष 2002 में इसी प्रकार के एक हादसे की जांच की थी। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में जल यातायात सुरक्षा आयुक्त की नियुक्ति की जाती तो ऐसे हादसे से बचा जा सकता था।
कुरूप ने एक समाचार चैनल से कहा, "यह देख कर दुख होता है कि ऐसे मामलों को देखने वाला कोई नहीं है। केवल यह कहना कि नौका नई थी, सही नहीं है। मैं जानना चाहता हूं कि नौका की क्या जांच हुई थी? मेरा मानना है कि नौका में कुछ गड़बड़ी थी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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