महात्मा गांधी की जीवनी अब भी सबसे अधिक बिकने वाली किताब
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। महात्मा गांधी की जीवनी अब भी सबसे अधिक बिकने वाली किताब बनी हुई है। तेजी से बदलते इस समय में अब भी प्रतिवर्ष गांधीजी की जीवनी की दो लाख प्रतियां बिकती हैं।
अहमदाबाद स्थित नवजीवन न्यास ने कहा है कि प्रकाशन समूहों की प्रतिस्पर्धा के बावजूद 'सत्य के मेरे प्रयोग' की बिक्री सबसे ऊंची बनी हुई है।
केवल 10 महीने पहले तक गांधीजी के सारे लेखन का कॉपीराइट नवजीवन न्यास के पास था।
नवजीवन न्यास के प्रबंध न्यासी जितेंद्र देसाई ने टेलीफोन पर आईएएनएस को बताया, "कॉपीराइट समाप्त होने से बिक्री पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ा। बिक्री पहले जैसे ही ऊंची है।"
उन्होंने बताया कि सभी भाषाओं में जीवनी की बिक्री करीब 200,000 प्रति है।
नवजीवन न्यास का प्रयास है कि गांधीजी का लेखन कार्य आमआदमी को उपलब्ध हो। उसका स्वयं का प्रकाशन गांधीजी के लेखन को कम कीमत पर प्रकाशित करता है।
कुछ प्रकाशकों ने गांधीजी के कुछ कार्यो का प्रकाशन महंगे कागज पर करना आरंभ किया है और उसे 4,000 रुपये तक की कीमत पर बेच रहे हैं।
गांधीजी का अधिकांश लेखन 100 खंडों के करीब 50,000 पेज में संकलित है।
गांधी शांति प्रतिष्ठान की पत्रिका 'गांधी मार्ग' के संपादक अनुपम मिश्र ने आईएएनएस को टेलीफोन पर बताया, 'गांधीजी बिना रुके लिखते थे। जब उनका दाहिना हाथ थक जाता था तो वह बाएं हाथ से लिखते थे। उनके द्वारा पत्रों और अन्य रूपों में लिखी गई करीब 30,000 पेज की सामग्री अभी बिखरी पड़ी है।"
यह अप्रकाशित सामग्री विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं के पास है।
विद्वानों और गांधीजी के प्रशंसकों का मानना है कि इस सामग्री को एकत्र करके किसी उपयुक्त प्राधिकारी के पास रखा जाना चाहिए।
गांधीजी ने वर्ष 1944 में अहमदाबाद के नवजीवन न्यास को अपने लेखन का कॉपीराइट दिया था। देश के कॉपीराइट कानून 1957 के अनुसार किसी भी व्यक्ति की मौत के 50 वर्ष बाद उसका लेखन सार्वजनिक संपत्ति हो जाता है।
इसके अनुसार एक जनवरी 2009 को गांधीजी के लेखन कार्य से नवजीवन न्यास का कॉपीराइट समाप्त हो गया।
अपनी स्थापना के समय से न्यास गांधीजी की जीवनी के विभिन्न भाषाओं में अनुवादों के अलावा लेखों, पत्रों और भाषणों सहित उनके लेखन कार्यो के करीब 300 खंड प्रकाशित कर चुका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**


Click it and Unblock the Notifications