1962 के भारत-चीन युद्ध का दोहराव नहीं होगा : वायु सेना प्रमुख
आठ अक्टूबर को मनाए जाने वाले वायु सेना स्थापना दिवस से पहले आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आईएएफ की क्षमता पर जोर देते हुए नाइक ने कहा, "1962 का दोहराव संभव नहीं है। मैं आश्वस्त हूं, क्या आप नहीं हैं?" भारत और चीन के बीच 1962 में सीमा विवाद को लेकर युद्ध हुआ था।
नाइक ने आगे कहा, "हम आधारभूत सुविधाओं का विकास कर रहे हैं, लेकिन यह किसी के खिलाफ नहीं है। यह क्षमता का विकास है .. सशस्त्र सेनाओं में आत्मविश्वास की कमी नहीं होनी चाहिए।"
नाइक ने पिछले माह यह स्वीकार कर एक तरह से घबराहट की स्थिति पैदा कर दी थी कि चीन की तुलना में वायु सेना की क्षमता एक तिहाई है और यह अपर्याप्त है।
यद्यपि, उन्होंने गुरुवार को कहा कि चीन से लगी सीमा पर वायु सेना व्यापक आधारभूत सुविधाओं का विकास कर रही है।
उन्होंने कहा, "नयोमा एयरफील्ड को हाल ही में अपग्रेड किया गया। इससे पहले फुकुच और दौलत बेग ओल्डी को अपग्रेड किया गया था। जहां तक अरुणाचल प्रदेश की बात है तो वहां पर कई एडवांस लैंडिंग ग्राउंड्स हैं जैसे आलोंग, माचुका, टुटिंग। इन्हें अपग्रेड करने के प्रयास जारी हैं।"
नाइक ने कहा, "मैं आपको बता दूं कि यह काफी पहले से लंबित था और अब हमें इसपर आगे बढ़ने की अनुमति मिली है। ऐसे में हम कार्यक्रमों को क्रियान्वित कर रहे हैं। ये सभी हवाई फील्ड सीमित संसाधनों में संचालित हो रहे हैं। अपग्रेड करने में तीन से पांच साल का समय लगेगा।"
वायु सेना ने हाल ही में चार अग्रणी सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को तेजपुर हवाई ठिकाने पर तैनात किया है। यहां एक पूरे दस्ते को तैनात करने की योजना है।
वायु सेना प्रमुख ने कहा, "हम तेजपुर हवाई ठिकानेपर आधारभूत सुविधाओं के तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं। "
यद्यपि, वायु सेना प्रमुख ने हाल में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की ओर से घुसपैठ की खबरों को दबाने की कोशिश की।
उन्होंने कहा, "घुसपैठ की कोई अलग घटना नहीं घटी है। हमें इस पर बहुत ज्यादा जोर नहीं देना चाहिए। इस पर निगरानी रखी जा रही है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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