भारत-चीन संबंधों को जटिल बना रहे हैं संघ और अमेरिकी लॉबी : करात
चीनी क्रांति की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर लिखे एक लेख में करात ने कहा, "कारपोरेट मीडिया और सामरिक विशेषज्ञों के कुछ धड़ों के बीच चीन से खतरे का हौवा फिर से बनाया जा रहा है।"
करात का यह लेख माकपा के मुखपत्र 'पीपुल्स डेमोक्रेसी' के आगामी अंक में आएगा। इसमें करात ने कहा, "मीडिया में एक खबर आई थी कि चीनी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में आईटीबीपी के दो जवान घायल हो गए। इस तरह की सारी खबरें या तो आधारहीन थीं या फिर उन्हें काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था।"
उन्होंने कहा, "दो एशियाई उभरती आर्थिक शक्तियां भारत और चीन को एक-दूसरे के बीच विवाद के स्रोत के रूप में पेश किया जा रहा है। रणनीति की भाषा में इसे चीन के भारत के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है। जिनके हाथों में विश्व अर्थव्यवस्था की बागडोर हैं उनके लिए भारत और चीन के बीच विवाद और संघर्ष से बेहतर कुछ और नहीं होगा।"
माकपा महासचिव ने संघ प्रमुख मोहन भागवत पर उनके उस बयान के लिए निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन और बांग्लादेश विस्तारवादी रवैये के साथ भारत के लिए समस्याएं खड़ी कर रहे हैं। करात ने कहा, "देश का दक्षिणपंथी धड़ा चीन से खतरे की बात को बढ़ावा दे रहा है।"
उन्होंने कहा, "यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि अमेरिका से गहरे सामरिक एवं सैन्य संबंधों की अनकही जरूरतों को बढ़ावा देने के साथ ही चीन के खिलाफ अधिक रक्षा तैयारियों की बात की जाए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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