तेल मूल्यों से आम आदमी को बचाने का हरसंभव प्रयास : देवड़ा

गुजरात के सूरत में तेल उद्योग के लोगों से मिलिए कार्यक्रम के अवसर देवड़ा ने कहा कि इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है कि बढ़ी ह़ुई कीमतों का पूर्ण असर उपभोक्ताओं तक न पहुंचे। मंत्री ने कहा कि सरकार तेल क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनियों की जरूरतों से वाकिफ है क्योंकि वे देश में ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में जुटी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षो में कच्चे तेल के वैश्विक मूल्यों में उतार चढ़ाव का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था तथा आम आदमी पर गहरा असर पड़ा है। भारत कच्चे तेल की अपनी आवश्यकता का 75 प्रतिशत आयात करता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को 2008-09 में पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री में 1,03,292 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। उन्होंने कहा कि देश में एक बड़ी ग्रामीण आबादी है जिसे बिजली और गैस मयस्सर नहीं है और वह रोशनी तथा भोजन पकाने के लिए पूरी तरह मिट्टी के तेल पर निर्भर है। सरकार इन वर्गो को 9 रुपये प्रति लीटर की दर से मिट्टी का तेल उपलब्ध करवा रही है जो 12 रुपये प्रति लीटर मिनरल वाटर दर से भी कम है।

उन्होंने कहा कि 2008-09 में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के मिट्टी के तेल तथा घरेलू एलपीजी पर 48,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी गयी है। फिलहाल देश में 11 करोड़ परिवारों यानी आधी से अधिक आबादी को एलपीजी आपूर्ति की जाती है। 2015 तक और साढ़े पांच करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिए जाने का लक्ष्य है यानी तब तक 75 प्रतिशत आबादी को गैस कनेक्शन मिल जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार ने डीजल की कीमतों को बाजार कीमतों से नीचे रखा है ताकि कृषि एवं परिवहन क्षेत्र कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार चढ़ाव से बचे रहें।

उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास है कि आम आदमी की आवश्यकताओं और तेल कंपनियों के विकास के बीच संतुलन कायम रहे। हालांकि यह एक कठिन चुनौती है लेकिन सरकार अपने मकसद में कामयाब रहेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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