दुनियादारी की चिंताओं से परे होते होते हैं जेबीएम आतंकवादी

जेबीएम के प्रशिक्षु को अपने शरीर पर जीवित बम और विस्फोटक बांध कर चलना होता और ट्रिगर प्रशिक्षक के पास होता है।

रिक्शा चलाने के प्रशिक्षण का दोहरा मकसद है। इससे एक तो युवा आतंकवादी का घमंड टूटता है और दूसरा रिक्शा चलाते हुए वह आसानी से अपनी पहचान छिपा कर दूसरों की बातें सुन सकता है।

गिरफ्तार किए गए जेबीएम सदस्यों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को यह जानकारी दी है।

एक जांचकर्ता ने डेली स्टार समाचार पत्र को बताया, " जेबीएम का पूर्णकालिक सदस्य बनने के लिए सदस्य को दुनियादारी की चिंताओं से खुद को अलग करना पड़ता है। सदस्य को अपनी जान और परिवार को खास तवज्जो न देने का प्रशिक्षण दिया जाता है।"

एक बार सैद्धांतिक सत्र पूरा होने के बाद प्रशिक्षु को कड़े शारीरिक अभ्यास के दौर से गुजरना पड़ता है। इस दौरान प्रशिक्षु को हथियार, गोला बारुद और विस्फोटक इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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