वैश्विक वित्तीय स्थिरता में सुधार, फिर भी खतरा बरकरार : आईएमफ
वाशिंगटन, 30 सितम्बर (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार अप्रत्याशित नीतिगत कदम उठाए जाने के बाद वैश्विक वित्तीय स्थिरता में सुधार हुआ है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी से उबरने के मजबूत संकेत मिल रहे हैं लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि वित्तीय अस्थिरता का खतरा पूरी तरह से टल गया है।
शेयरों की बढ़ती कीमतों के कारण आईएमएफ ने 2007-10 के बीच मंदी के दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 340 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान लगाया है। इस्तांबुल में बुधवार को जारी की गई वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (जीएफएसआर) में यह आकलन पेश किया गया है। नया आकलन पिछले जीएफएसआर की तुलना में 600 अरब डॉलर कम है।
रिपोर्ट में आईएमएफ-विश्व बैंक समूह की सालाना बैठक से पहले कहा गया है कि तंत्रीय खतरों में कमी आई है लेकिन नीतिगत चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।
आईएमएफ का कहना है कि नीति निर्माताओं को पटरी पर लौट रही अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ऋण प्रवाह में तेजी लाने, प्रोत्साहन कदमों से हाथ खींचने की उचित रणनीति तैयार करने और भुगतान संतुलन से जुड़े खतरों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा नीति निर्माताओं को भविष्य में तंत्रीय खतरों को कम करने के लिए नियमन और बाजार की ताकतों में संतुलन बनाने का प्रयास करना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नीति निर्माताओं को बाजार में अनुशासन बनाए रखने, तंत्रीय संस्थाओं द्वारा पैदा किए गए खतरों का समाधान करने पर जोर देना चाहिए।
जीएफएसआर में कहा गया है कि वित्तीय संस्थान पूंजी पुनर्गठन, आय में वृद्धि और सरकार का समर्थन देने वाले कदमों से हाथ खींचने जैसे तीन प्रमुख चुनौतियों का सामना करते रहेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदी के कारण धराशाई हुआ शेयर बाजार का कारोबार फिर से तेजी की राह पर है लेकिन ऋण की वापसी न होने से बैंकों को अगले कई सालों तक ऋण का भारी नुकसान झेलना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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