नाव दुर्घटनाओं में 200 लोग गंवा चुके जान
ऐसा नहीं है कि राज्य में नौका दुर्घटना की यह कोई पहली घटना है। पिछले एक दशक के आंकड़ों पर गौर करें तो नौका दुर्घटना में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। ज्ञात हो कि ये आंकड़ें सिर्फ बड़ी घटनाओं के हैं।
बिहार के दरभंगा जिले के कुशेश्वर स्थान थाना के कोसी नदी में मंगलवार को हुई दुर्घटना में नौ लोगों की मौत हो गई। इसी तरह सोमवार की देर रात खगड़िया जिले के अलौली थाना क्षेत्र में करेल नदी में हुई एक नौका दुर्घटना में 19 लोगों की मौत हो गई जबकि अभी भी 30 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।
इसी तरह एक माह पूर्व 17 अगस्त को मोतिहारी के बरगनिया घाट के पास लालबेकिया नदी में एक नाव पलट जाने से पांच लोगों की मौत हो गई थी।
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2008 में मधेपुरा जिला के मीरगंज में कोसी नदी में नाव पलटने से जहां 20 लोग असमय काल की गाल में समा गए थे वहीं वर्ष 2007 में मोतिहारी जिला के बंजरिया थाना के सिकरहना में हुई नौका दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हो गई थी।
पटना सिटी के गंगा नदी में वर्ष 2006 में नाव पलटने से 27 लोगों की मौत हो गई थी जबकि पिछले दो दशकों में सबसे बड़ी नौका दुर्घटना 1997 में हुई थी। पटना के दानापुर में गंगा नदी में हुई एक नाव दुर्घटना में 70 लोगों की मौत हो गई थी।
इसी तरह वर्ष 1996 में मोतिहारी जिला के बंजरिया थाना क्षेत्र में बागमती नदी में हुई नौका दुर्घटना में 24 लोगों की मौत हो गई थी।
जानकारों का कहना है कि नाव दुर्घटना का मुख्य कारण नाव का जर्जर होना और उस पर क्षमता से अधिक लोगों का सवार हो जाना है। जानकार बताते हैं कि कई क्षेत्रों में लोगों के आवागमन के लिए नाव के अलावा कोई साधन नहीं होता है और नाव की संख्या कम होती है। इस कारण लोग नाविक के मना करने के बाद भी नाव पर सवार हो जाते हैं और दुर्घटना हो जाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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