प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा की वकालत की (लीड-3)
नई दिल्ली, 29 सितम्बर (आईएएनएस)। व्यापक परमाणु नि:शस्त्रीकरण पर देश की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को वैश्विक अप्रसार तंत्र में व्याप्त कमियों को रेखांकित किया और कहा कि इससे देश की सुरक्षा पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।
परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर यहां आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मनमोहन सिंह ने भारत के लिए परमाणु ऊर्जा के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया और तीन दशकों के अंतराल के बाद देश के वैश्विक परमाणु की मुख्यधारा में वापसी की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने कहा, "यदि हमने परमाणु कार्यक्रम के तीन चरणों का प्रबंधन कर लिया तो वर्ष 2050 तक भारत 470,000 मेगावाट बिजली पैदा कर सकता है।"
अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करने के नए वैश्विक दबाव के बीच मनमोहन सिंह ने परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक प्रतिबंध को दोहराते हुए कहा कि भारत विखंडनीय पदार्थ कटौती संधि (एफएमसीटी) पर बातचीत में एक परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के तौर पर हिस्सा लेगा।
अमेरिका और रूस के परमाणु हथियार भंडारों में कटौती की पहल का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने व्यापक जनसंहार के परमाणु हथियारों का प्रसार रोकने के प्रति भारतीय संकल्प को दोहराया और जोर दिया कि परमाणु अप्रसार को सफल होने के लिए इसे 'वैश्विक और भेदभावरहित' होना होगा।
डा. सिंह ने कहा कि वैश्विक परमाणु अप्रसार तंत्र परमाणु प्रसार रोकने में नाकाम रहा है।
उन्होंने कहा कि परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का जिम्मेदार सदस्य होने के नाते भारत नि:शस्त्रीकरण वार्ता में विखंडनीय पदार्थ कटौती संधि (फिसाइल मैटीरियल कटऑफ ट्रीटी) में रचनात्मक हिस्सेदारी करेगा।
उन्होंने जोर दिया कि भारत परमाणु परीक्षणों पर स्वैच्छिक एकतरफा रोक के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "यह बड़े खेद की बात है कि वैश्विक परमाणु अप्रसार तंत्र परमाणु प्रसार रोकने में विफल रहा है। इसकी कमियों ने दरअसल हमारी सुरक्षा पर प्रतिकूल असर डाला है। वैश्विक परमाणु अप्रसार को कामयाब होने के लिए इसे सार्वभौमिक, व्यापक और भेदभावरहित होना चाहिए। साथ ही इसका लक्ष्य मुकम्मल परमाणु नि:शस्त्रीकरण होना चाहिए।"
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु मुख्यधारा में भारत का लौटना न केवल भारत के लिए वरन अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।
इस सम्मेलन में दुनिया भर के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक परमाणु ऊर्जा के विकास और उसके शांतिपूर्ण इस्तेमाल के विकल्पों पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्र हुए हैं।
सम्मेलन का आयोजन भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के संस्थापक डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा की जन्मशती के तहत साल भर चलने वाले समारोह के हिस्से के रूप में किया जा रहा है। भाभा इस विषय पर 1955 में जेनेवा में आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के अध्यक्ष थे।
सम्मेलन का आयोजन परमाणु ऊर्जा विभाग, आईएईए और इंडियन न्यूक्लियर सोसायटी के साथ मिलकर कर रहा है।
सम्मेलन में दुनिया भर के परमाणु वैज्ञानिकों के अलावा अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक मोहम्मद अलबरदेई भी शिरकत कर रहे हैं।
सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में पिछले पांच दशकों में हुई तरक्की की समीक्षा करेंगे और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल की चुनौतियों पर विचार विमर्श करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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