भारतीय विमान का अपहृर्ता कनाडा में वकालत का इच्छुक
उसने 14 साल पहले कनाडा में शरण ली थी और भारत की प्रत्यर्पण की मांग का सामना कर रहा है।
श्रीनगर से नई दिल्ली जा रही इंडियन एयरलाइंस की उड़ान का वर्ष 1984 में पांच सिख युवकों ने अपहरण किया और उसे लाहौर ले गए थे। सैनी उस साजिश का सूत्रधार था।
अपहृर्ताओं के पाकिस्तानी अधिकारियों के सामने समर्पण करने के बाद 17 घंटे चला अपहरण का नाटक समाप्त हुआ।
पाकिस्तान में चले मुकदमे में सैनी को लाहौर की एक अदालत ने मौत की सजा दी। बाद में उसकी सजा आजीवन कारावास में बदल दी गई। उसने 10 वर्ष जेल में बिताए और रिहा होने के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने उसे देश छोड़ने को कहा।
सैनी कथित तौर पर पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा मुहैया कराए गए एक जाली अफगानी पासपोर्ट के सहारे बलबीर सिंह के नाम से वर्ष 1995 में कनाडा में दाखिल हुआ। कनाडा में उसने स्नातक और कानून की डिग्री हासिल की।
प्रत्यर्पण के खतरे का सामना कर रहे और कनाडा के लिए राष्ट्रीय खतरे के रूप दर्ज सैनी ने अब लॉ सोसायटी ऑफ अपर कनाडा से वकालत की अनुमति देने का आग्रह किया है।
हाल में लॉ सोसायटी के समक्ष उपस्थित सैनी ने कहा कि उसे अपने बीते कल पर खेद है।
इस समय सैनी 46 वर्ष का है और अपने भाई की प्रवासी सलाहकार फर्म से जुड़ा हुआ है। हवाई अड्डे पर उसने अधिकारियों से झूठ बोला था कि कनाडा में उसका कोई रिश्तेदार नहीं है, जबकि उसकी मां और भाई कनाडा में ही थे। उसे आठ महीने बाद कनाडा की खुफिया एजंसी ने धर दबोचा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications