हिमाचल में सप्ताह भर के दशहरा उत्सव का शुभारंभ
कुल्लू, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। सप्ताह भर तक चलने वाले हिमाचल प्रदेश के कुल्लू दशहरा उत्सव का सोमवार को शुभारंभ हो गया।
सदियों पुराना यह उत्सव यहां 'विजयादशमी' के दिन शुरू होता है जबकि देश के बाकी हिस्सों में इस दिन उत्सव का समापन होता है। देश के अन्य हिस्सों की तरह कुल्लू में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले नहीं जलाए जाते।
उपायुक्त (कुल्लू) बी. सी. नान्टा ने आईएएनएस से कहा, "सप्ताह भर चलने वाला कुल्लू दशहरा उत्सव सुबह शुरू हो गया। सजी-धजी पालकियों में करीब 200 देवता ढालपुर मैदान में पहुंच गए। प्रमुख देवता भगवान रघुनाथ का रथ भी ढोल नगाड़ों और तुरहियों की गूंज के बीच मंदिर से बाहर आ गया।"
उत्सव के दौरान विभिन्न गांवों के देवता यहां रहेंगे और भगवान रघुनाथ (कुल्लू घाटी में भगवान राम को इसी नाम से जाना जाता है) को प्रणाम करेंगे।
राज्यपाल प्रभा राउ ने उत्सव का शुभारंभ किया। वह भगवान रघुनाथ की पालकी वहां पहुंचने के समय उपस्थित थीं।
कुल्लू में 1637 में राजा जगत सिंह के शासनकाल से यह उत्सव मनाया जा रहा है। दशहरा के दौरान भगवान रघुनाथ के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए राजा ने सभी स्थानीय मंदिरों के देवताओं को आमंत्रित किया था।
तभी से कुल्लू और आस-पास की घाटी के हजारों देवताओं की वार्षिक-सभा का आयोजन एक परंपरा बन गई है।
यह देश का अकेला ऐसा उत्सव है जहां एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में देवता इकट्ठे होते हैं।
सप्ताह भर चलने वाले उत्सव में विशेष सांस्कृतिक आयोजनों के साथ ही एक मेला भी आयोजित किया गया है। कुल्लू और किन्नौरी शालें, हस्तशिल्प की वस्तुएं, कालीन और सूखे मेवे इस मेले का विशेष आकर्षण हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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