बच्चों को गोद लेने के इंतजार में हैं सैंकड़ों अभिभावक
नई दिल्ली, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। करीब 900 अभिभावक कतार में हैं लेकिन गोद लेने के लिए बच्चे ही उपलब्ध नहीं हैं। बच्चा गोद लेने में सहायता करने वाली राजधानी की एजेंसियां आजकल बच्चों की भारी कमी का सामना कर रही हैं और उनका मानना है कि इसकी अहम वजह है कि अब अविवाहित महिलाएं अपने बच्चों को त्यागना नहीं चाहतीं।
दिल्ली में ऐसी एजेंसियों के स्वैच्छिक संघ 'कोऑर्डिनेटिंग वॉलेंट्री एडोप्शन रिसोर्स एजेंसी' (सीवीएआरए) की सचिव लीला बेग कहती हैं, "हम बच्चों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। पिछले चार वर्षो से यह स्थिति है।"
एक साक्षात्कार में बेग ने आईएएनएस से कहा, "ऐसे कोई कारण या अध्ययन नहीं हैं जिससे पता चल सके कि बच्चों की संख्या में कमी क्यों हो रही है। लेकिन हमें लगता है कि ऐसा चार प्रमुख कारणों से हो रहा है। ये कारण हैं- अविवाहित महिलाएं अपने बच्चों को अपने पास ही रखना चाहती हैं, एड्स जागरूकता अभियान ने युवाओं को सावधानी बरतने के लिए प्रेरित किया है, बच्चों को निजी तौर पर गोद लेना व लिंग निर्धारण परीक्षणों पर रोक के बावजूद ऐसा हो रहा है।"
उन्होंने कहा कि जो अविवाहित महिलाएं पहले सामाजिक-आर्थिक स्थिति और समाज के डर से अपने शिशुओं को त्याग देती थीं अब वे उनका पालन-पोषण करती हैं।
बेग कहती हैं कि एचआईवी और एड्स के प्रति जागरूकता अभियानों में सुरक्षित यौन संबंधों पर जोर देना एक अन्य कारण है।
उन्होंने कहा, "ज्यादातर गरीब अभिभावक अपने बच्चों को अस्पताल या नर्सिग होम में ही छोड़ देते हैं। ये अस्पताल और नर्सिग होम प्लेसमेंट एजेंसियों की तरह व्यवहार करते हैं। यह व्यवसायिक लेन-देन बहुत सामान्य हो गया है परिणामस्वरूप लाइसेंसधारी एजेंसियों में पंजीकरण कराने वाले लोग परेशानियों का सामना कर रहे हैं।"
एजेंसी ने 2005 में 413 बच्चे गोद दिए थे। जबकि और 1,029 बच्चों को गोद लिए जाने की मांग थी। 2006 में 1,010 बच्चों को गोद लेने की मांग थी लेकिन 262 बच्चे ही गोद दिए जा सके। 2007 में यह मांग 1,316 थी और 384 बच्चे गोद दिए जा सके। 2008 में 962 अभिभावक बच्चे गोद लेना चाहते थे लेकिन 384 ही भाग्यशाली रहे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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