बंगाल में देवी दुर्गा को अश्रुपूर्ण विदाई
परंपरा का निर्वहन करते हुए देवी दुर्गा की प्रतिमाओं के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिक की प्रतिमाओं को भी हर्षोल्लास के साथ गंगा व राज्य की अन्य नदियों में विसर्जित किया गया।
इस अवसर पर महिलाओं ने प्रतिमाओं व एक-दूसरे को सिंदूर लगाया। उन्होंने देवताओं को मिठाई का भोग भी किया।
एक श्रद्धालु संदीप्ता बसु ने कहा, "मैं 'सिंदूर खेला' (सिंदूर लगाना) का पूरा आनंद ले रही हूं। शादी के बाद यह मेरी पहली दुर्गा पूजा है।"
इस परंपरा का निर्वहन करते हुए विवाहित महिलाओं ने अपने परिवार की सुख समृद्धि व पति की लंबी आयु की कामना की।
कलम और किताबों के साथ स्कूली बच्चे भी पंडालों में नजर आए। उन्हें विश्वास था कि अच्छे शैक्षिक भविष्य के लिए देवी दुर्गा उन्हें आशीर्वाद देंगी।
विसर्जन के बाद अब बंगाली लोगों ने एक-दूसरे को शुभ बिजोया (विजयादशमी की बधाई) कहा और एक-दूसरे के घर मिठाई लेकर पहुंचने लगे। राज्य की मिठाई की दुकानों पर सोमवार को काफी भीड़ रही और अगले सप्ताह तक ऐसी स्थिति बनी रहेगी।
राज्यभर में मूर्तियों का विसर्जन एक ही दिन नहीं होता है। पारंपरिक रूप से पूजा आयोजित करने वाले दशमी के दिन विसर्जन करते हैं जबकि सामुदायिक रूप से पूजा आयोजित करने वाले कुछ लोग एक-दो दिन बाद प्रतिमाएं विसर्जित करते हैं।
विसर्जन स्थलों पर कई विदेशी भी अपने कैमरों के साथ मौजूद थे। वे सालभर में एक बार आयोजित होने वाले इस रंग-बिरंगे उत्सव को अपने कैमरे में कैद कर रहे थे।
एक पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "विसर्जन स्थल के घाटों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। आज प्रमुख रूप से पारंपरिक मूर्तियों और कुछ सामुदायिक पूजा की मूर्तियों का विसर्जन होगा। जबकि कुछ सामुदायिक मूर्तियों का विसर्जन मंगलवार और बुधवार को होगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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