गोवा पुलिस ने दी नागरिकों को मारने की धमकी: मानवाधिकार संगठन

राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन पुलिस के कदाचार और ज्यादतियों की जांच करने के लिए किया गया है। एक मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया है।

कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स ग्रुप ऑफ इंडिया(सीएचआरआई) ने अपनी रिपोर्ट ' कंपलेंट्स अथॉरिटी : पुलिस अथॉरिटी इन एक्शन" 2009 में गोवा सरकार पुलिस पर गोवा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण (जीएसपीसीए) को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। जीएसपीसीए की स्थापना 2006 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की गई थी।

सीएचआरआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा,"जीएसपीसीए के सदस्यों ने हमे सूचित किया है कि जागरुकता की कमी के कारण निचले तबके के लोग हमारे पास बेहद कम शिकायतें भेजते हैं। इसके अलावा पुलिस ने लोगों को शिकायत दर्ज कराने से रोकने के लिए हतोत्साहित करने के लिए अभियान चला रखा है।"

रिपोर्ट में कहा गया है," कुछ शिकायतकर्तओं को पुलिस ने मुठभेड़ में जान से मार देने की धमकी दी है।"

रिपोर्ट में एक पूर्व नौकरशाह और प्राधिकरण के सदस्य एम.जी नाईक के हवाले से कहा गया है कि जीएसपीसीए के साथ सरकार 'अनचाहे बच्चे' की तरह व्यवहार कर रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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