नन्हें हाथों ने पहली बार लिखा अक्षर
तिरूवनंतपुरम, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। केरल के हजारों बच्चों ने सोमवार को शिक्षा शास्त्रियों, साहित्यकारों, शिक्षकों और राजनेताओं की मदद से अपने जीवन का पहला अक्षर लिखकर 'विजयादशमी' का पर्व मनाया।
इस दिन आमंत्रित दिग्गजों ने नन्हे बच्चों का हाथ पकड़कर उनसे चावल से भरी तश्तरी और कुछ स्थानों पर रेत में मलयाली वर्णमाला का पहला अक्षर लिखवाया।
यह 'विद्याआरंभम् संस्कार' था। प्रदेशभर के मंदिरों, संस्थानों, क्लबों, मीडिया हाउसों और साथ ही गिरजाघरों में भी इसका आयोजन हुआ।
हिंदुओं ने भगवान गणेश की स्तुति में 'हरि श्री गणपत्ये नम:' लिखा जबकि ईसाई बच्चों ने ईसा मसीह को याद करते हुए 'श्री यीशू मसीहाय नम:' लिखा। इसके बाद बच्चे का हाथ थामने वाली हस्ती ने सोने की अंगूठी से बच्चे की जिव्हा पर एक मलयाली अक्षर लिखा।
भारी वर्षा के बावजूद सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा हो रही थी। यहां से 350 किलोमीटर दूर स्थित थुंचन प्रमभु में सबसे ज्यादा लोग इकट्ठे हुए। यहां पर 5,000 से अधिक नन्हे बच्चों ने अपना पहला 'पाठ' सीखा।
कोट्टायम जिले के पनचिक्कडु के सरस्वती मंदिर में भारी संख्या में लोग इकट्ठे हुए। इस मंदिर को दक्षिणा मूकाम्बिका भी कहते हैं। बारिश के बावजूद यहां 'सीखने की दुनिया' में अपने बच्चों की शुरूआत कराने के लिए उत्सुक अभिभावकों की लंबी कतार थी। राजधानी के सभी सरस्वती मंदिरों में लोगों की भारी भीड़ जमा हुई थी।
सेंट जॉर्ज आर्थोडॉक्स गिरजाघर के पादरी पी. जी. जोस ने गिरजाघर परिसर में कार्यक्रम की शुरूआत की। जोस ने आईएएनएस से कहा, "गिरजाघर में 30 बच्चे आए। सहायक पादरी और मैंने बच्चों की 'सीखने की दुनिया' की शुरूआत कराई। बच्चों में हिंदू बच्चे भी शामिल थे और हमने यीशु, मां और ईश्वर जैसे सामान्य शब्द लिखे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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