फ्रैंकफर्ट ऑटो मेले में सबकी नजरें भारत पर
फ्रैंकफर्ट, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मोटर प्रदर्शनी में जर्मन कार निर्माताओं की नजर खास तौर पर भारतीय कार बाजार पर लगी रहीं। जबकि कभी यहां भारतीय कारों को 'विश्व की बैलगाड़ी' करार दिया गया था।
रविवार को समाप्त हुई 10 दिवसीय प्रदर्शनी के दौरान भारतीय बाजार की चुनौतियों से रूबरू होने के लिए खास तौर पर भारत दिवस का आयोजन किया गया। अंतर्राष्ट्रीय मोटर प्रदर्शनी का आयोजन ऐसे समय किया गया जब वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के भंवर से निकलने की जद्दोजहद में फंसी हुई है।
अपनी आर्थिक दिक्कतों और यूरोप, जापान और अमेरिका के पारंपरिक बाजारों में मांग घटने के कारण जर्मन कार निर्माता ब्रिक यानी-ब्राजील,रूस,भारत,और चीन में मौजूद संभावनाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
जर्मन कार निर्माताओं के लिए मंदी के दौर में भारत एक बेहतर बाजार साबित हो सकता है क्योंकि यहां मध्यम वर्ग के लोगों की एक बड़ी तादाद है जो लग्जरी सुविधाओं की कीमत चुका सकती है और उसमें विदेशी ब्रांडों के प्रति जबर्दस्त आकर्षण है।
जर्मन ऑटोमोबाईल एसोसिएशन के अध्यक्ष मैट्टथियास विस्मान ने कहा, " बिक्री और राजस्व में गिरावट जारी रहने से जर्मन कार उद्योग की हालत खराब है और ज्यादातर जर्मन कार निर्माताओं का मानना है कि कोई भी भारतीय बाजार को नजरअंदाज नहीं कर सकता।"
कंसलटेंसी फर्म मैनेजमेंट इंजीनियर्स का आकलन है कि भारत में छोटी कारों का बाजार चीन के बाद दूसरा सबसे तेज गति से बढ़ने वाला बाजार है। भारत के कार बाजार में छोटी कारों का हिस्सा 61 फीसदी है। वहीं वैन और एसयूवी का हिस्सा 13 फीसदी है।
हालांकि जर्मन ऑटोमोबाईल विशेषज्ञ इस बात से वाकिफ हैं कि भारत के कार बाजार में जगह बनाना आसान नहीं हैं। जर्मनी के बड़े कार निर्माता जैसे ऑडी, बीएमडब्ल्यू और डेमलेर का मानना है कि भारतीय कम कीमत में बेहतर उत्पाद चाहते हैं।
ऐसे समय में जब जर्मनी के लोग 1400 यूरो में बिक रही नैनो की कीमतों पर बात कर रहे हैं जर्मन कार उद्योग भारतीय कार निर्माताओं के कदमों पर भी नजर रख रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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