'कश्मीर में सूचना का अधिकार समस्याओं से घिरा'

मयंक अग्रवाल

नई दिल्ली, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। उमर अब्दुल्ला की सरकार को जम्मू एवं कश्मीर सूचना का अधिकार (जेकेआरटीआई) कानून 2009 लाए छह महीने बीत चुके हैं लेकिन आज तक उसका कार्यान्वयन शुरू नहीं हो सका।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राज्य सरकार ने अभी तक सूचना आयोग का गठन नहीं किया है और विभिन्न सरकारी विभागों में जन सूचना अधिकारियों की तैनाती भी नहीं हुई है।

दिल्ली के आरटीआई कार्यकर्ता मनीष सिसोदिया ने आईएएनएस को बताया आरंभ में राज्य सरकार ने आरटीआई की सफलता के लिए ढेरों वादे किए लेकिन अब ऐसा नहीं है। राज्य में आरटीआई आधारभूत ढांचे की समस्याओं से घिर गया है।

जेकेआरटीआई कानून 2009 केंद्रीय आरटीआई कानून 2005 के अनुरूप बनाया गया है। जेकेआरटीआई (संशोधन)कानून 2008 को हटाकर मार्च में इसे लागू किया गया।

सिसोदिया हाल ही में एक आरटीआई कार्यक्रम के सिलसिले में जम्मू गए थे, जहां लोगों ने उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि मूल समस्या यह है कि सरकार ने अभी तक कई विभागों में जन सूचना अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की है।

जम्मू स्थित आरटीआई कार्यकर्ता नियामत अली की भी यही शिकायत है। उन्होंने कहा, "कार्यालयों में जन सूचना अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गई है। जब भी मैं अपनी आरटीआई याचिका लेकर जाता हूं, वे उसे स्वीकार करने से इंकार कर देते हैं और बाद में आने के लिए कहते हैं।"

पेशे से दंत चिकित्सक राजा मुजफ्फर बट ने कहा कि सरकार ने अभी तक सूचना आयोग की भी नियुक्ति नहीं की है, जो आरटीआई कानून का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

दूसरी ओर राज्य सरकार ने इस कानून के क्रियान्वयन में किसी किस्म की समस्या होने से इंकार किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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