खतरे में हैं दुधवा के बाघ
दुधवा(उत्तर प्रदेश), 27 सितम्बर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में स्थित दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में बाघों के छिपने के लिए कोई जगह नहीं है। इस उद्यान से होकर बसें और रेलगाड़ियां गुजरती हैं, इस वजह से शिकारी बाघों के आसपास आसानी से घूमते रहते हैं।
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी जिले में 680 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह राष्ट्रीय उद्यान में लगभग 60 बाघों का निवास है।
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान नेपाल से सटी खुली अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ है। इस पार्क में 25 किलोमीटर लंबे पालिया-गौरीपहनाता मार्ग से प्रतिदिन करीब 100 से ज्यादा भारी वाहनों का आवागमन होता है। इसके अलावा दुधवा-चंदनचौकी, चंदन चौकी-दिनगानिया, भीरा-मैलानी, और चंदन चौकी-मोरनोचानी सड़कों से वाहनों का आवागमन होता है।
यहां चलने वाली बसों में जंगल के अंदर स्थित गांवों के लोग यात्रा करते हैं और नेपाली नागरिक गौरीपहानता सीमा चौकी से भारत आते जाते हैं।
उद्यान के उप निदेशक पिनाकी पी.सिंह के अनुसार पालिया-गौरीपहनाता से भारी वाहनों के आवागमन के लिए एक अन्य सड़क के निर्माण का प्रस्ताव है।
यह प्रस्तावित सड़क संभवत: सुमरनगर के पास बनेगी जो इस अभयारण्य से करीब 9-12 किलोमीटर दूर है। वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) द्वारा इस योजना का अध्ययन किया जा रहा है।
सिंह ने कहा, "भारी वाहन हमारे लिए बड़ा खतरा हैं। इस सड़क पर केवल छोटे वाहनों के आवागमन की अनुमति होगी।"
सिंह ने आईएएनएस को बताया,"सभी तरह की गैरकानूनी गतिविधियों, वन्यजीव व्यापार, हथियार और मादक पदार्थो की तस्करी सीमा पर हो रही है। वन के सुरक्षाकर्मी अपराध कर सीमा पार कर रहे लोगों पर कार्रवाई नहीं कर सकते।"
सिंह ने कहा कि 35 किलोमीटर लंबे पालिया-दुधवा-वेलेरियन रेलमार्ग पर 13 यात्री रेलगाड़ियां प्रतिदिन चलती हैं।
हम पिछले 10 वर्षो से रेल सेवा को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। रेलवे मंत्रालय भी इस समस्या के प्रति गंभीर है लेकिन अभी तक इसे रोकने में असफल साबित हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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