'वे नमूने शोपियां पीड़ितों के नहीं थे'
सूत्रों के अनुसार महिला चिकित्सक ने इस मामले की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के दल के समक्ष यह स्वीकार किया है कि जो नमूने उसने भेजे थे, वे नीलोफर जान (22) और आसिया जान (17) के नहीं थे।
महिला चिकित्सक ने स्वीकार किया है कि नमूने के रूप में उसने अन्य दो महिलाओं से लिए गए नमूनों की स्लाइडें भेजी थी। ये नमूने पुलवामा अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड से लिए गए थे। उस वक्त महिला चिकित्सक पुलवामा अस्पताल में तैनात थी।
नई दिल्ली में फोरेंसिक लैब के विशेषज्ञों ने इस बात का खुलासा किया था कि उनके पास भेजी गई स्लाइड के डीएनए नमूने न तो दोनों युवतियों से मेल खा रहे हैं और न इस मामले में आरोपी चारों पुलिसकर्मियों से ही। इन पुलिसकर्मियों पर साक्ष्य को नष्ट करने का आरोप है और इस वजह से उन्हें निलंबित और गिरफ्तार किया गया है।
सीबीआई ने साक्ष्य जुटाने के लिए शोपियां के जिला अधिकारी से दोनों युवतियों के शवों को कब्र से निकालने की मंजूरी हासिल कर ली है। सोमवार को शवों को कब्र से बाहर निकाला जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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