अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों की नजर भारत पर

वाशिंगटन, 27 सितम्बर (आईएएनएस)। सोवियतयुगीन हथियारों को हटाने के लिए भारत की 100 अरब डॉलर की संभावित रक्षा खरीद को देखते हुए अमेरिका की बड़ी हथियार कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं ने भारतीय रक्षा एजेंटों और अधिकारियों को लुभाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

समाचार पत्र 'वाशिंगटन पोस्ट' के अनुसार रेथियॉन और नार्थरोप ग्रुमैन जैसी रक्षा कंपनियां नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में छोटी बेसबाल टीमों का प्रायोजन कर रही हैं। टीमों की यूनिफार्म पर इन कंपनियों के नाम लिखे हैं।

अखबार के अनुसार तकरीबन हर सप्ताह नई दिल्ली के पांच सितारा होटलों में बंद दरवाजों के पीछे काकटेल पार्टियां और 'प्रेजेंटेशन' आयोजित हो रहे हैं। अब हथियार कंपनियों के लिए काम कर रहे अमेरिकी सेनाओं के अवकाश प्राप्त जनरल और एडमिरल भारतीयों को हथियारों की खूबियों जानकारी दे रहे हैं।

नई दिल्ली में 12 व्यक्तियों का कार्यालय संचालित करने के लिए ताज पैलेस होटल की एक शाखा का आधा हिस्सा किराए पर लेनी वाली लाकहीड मार्टिन इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोजर रोज ने कहा कि भारत पुरानी पीढ़ी के हथियारों को हटाने और आधुनिक सेना बनाने की राह पर है और यह इसका निर्णायक क्षण है।

अखबार के अनुसार भारत ने अपने परंपरागत हथियार आपूर्तिकर्ता रूस की अनदेखी कर दी है और हथियार प्रणाली को उन्नत बनाने के लिए अमेरिका की ओर देख रहा है।

ओबामा प्रशासन ने भी लाकहीड और बोइंग कंपनियों को भारत को जेट लड़ाकू विमानों के लिए अत्याधुनिक रडार बिक्री की अनुमति देकर हथियार सौदे का रास्ता काफी हद तक आसान कर दिया है।

भारत की खरीद सूची में इस समय 126 लड़ाकू विमान, 155 मिलीमीटर के होवित्जर तोपें, लंबी रेंज के समुद्री टोही विमान, बड़े मालवाहक विमान और पनडुब्बियां शामिल हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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