कैदियों के लिए भी कारगर बना सूचना का अधिकार

नई दिल्ली, 27 सितम्बर (आईएएनएस)। देश के सबसे बड़े कारागार, तिहाड़ जेल के कैदी सूचना के अधिकार (आरटीआई) को अपना हथियार बना रहे हैं। इससे जेल के आला अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है।

तिहाड़ जेल में बंद कैदी, सूचना के अधिकार का प्रयोग जेल अधिकारियों के ऊपर ही कर रहे हैं। इसके तहत ये कैदी जेल अधीक्षकों के पिछले रिकॉर्ड के बारे में जानकारी मांग रहे हैं। जेल अधीक्षकों की संपत्ति का व्योरा भी मांगा जा रहा है।

जेल सूत्रों के मुताबिक पिछले छह माह के दौरान लगभग 60 से अधिक आरटीआई के मामले जेल प्रशासन ने दर्ज किए हैं। जेल प्रशासन इस दुविधा में है कि आरटीआई के इन मामलों को कैसे सुलझाया जाए।

तिहाड़ जेल में सामान्य कैदियों के अलावा शिवानी भटनागर हत्याकांड के अभियुक्त और आईपीएस अधिकारी रविकांत शर्मा भी सूचना के अधिकार का प्रयोग कर जेल अधिकारियों के बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

गौरतलब है कि तिहाड़ जेल में कैदियों के उत्पीड़न के छिटपुट मामले सामने आते रहते हैं। कैदी अपने उत्पीड़न की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी करते रहते हैं। लेकिन जब से सूचना के अधिकार का हथियार उनके हाथ लगा है, तब से वे उत्पीड़न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ इस अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि तिहाड़ केंद्रीय कारागार में लगभग 12,000 कैदी हैं। इनमें 100 से अधिक हाइप्रोफाइल कैदी हैं। इनमें प्रमुख रुप से आर.के.शर्मा, अफजल गुरु, विकास यादव, सुशील शर्मा, रोमेश शर्मा और मनु शर्मा जैसे लोग अलग-अलग बैरकों में कैद हैं।

जेल सूत्रों के मुताबिक जेल के अंदर कैदियों के उत्पीड़न का मामला भी काफी बढ़ रहा है। ऐसे मामलों की गिनती करें तो एक वर्ष में एक हजार की संख्या पार हो जाएगी।

जेल के अंदर आए दिन कैदियों के बीच अपने ब्लेडबाजी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। जेल के अंदर आत्महत्या के मामले भी सामने आते रहते हैं। इन समस्यायों से निपटने के लिए जेल अधिकारियों द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन इन पर लगाम लगाने में जेल प्रशासन अभी तक विफल रहा है।

तिहाड़ जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने आईएएनएस को बताया, "जेल में बंद कैदी अब जागरुक हो गए हैं। वे सूचना के अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। कैदियों द्वारा प्रति माह औसतन सात से 10 आरटीआई डाली जा रही है। पिछले छह महीनों में 60 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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