परमाणु नि:शस्त्रीकरण समझौता भेदभावपूर्ण नहीं होना चाहिए : कृष्णा (लीड-1)
शनिवार देर रात संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र में हिस्सा लेते हुए विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने कहा, "भारत के लिए परमाणु नि:शस्त्रीकरण सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसका अप्रसार का रिकॉर्ड बेदाग है।"
कृष्णा ने कहा, "हम परमाणु हथियारविहीन दुनिया का लक्ष्य हासिल करने की नई वैश्विक चर्चा का स्वागत करते हैं। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था भेदभावपूर्ण नहीं हो सकती। सभी राष्ट्रों को अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभानी होंगी।"
सभी देशों को परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पारित एक प्रस्ताव के संदर्भ में कृष्णा ने कहा कि परमाणु हथियार संपन्न देश होने के नाते भारत परमाणु हथियारविहीन राष्ट्र के रूप में इस भेदभावपूर्ण एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।
कृष्णा ने याद दिलाया कि भारत ने वर्ष 2006 में एक आधार पत्र सहित परमाणु नि:शस्त्रीकरण पर संयुक्त राष्ट्र में कई सारे प्रस्ताव पेश किए थे।
कृष्णा ने जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों की सहायता की भी अपील की।
उन्होंने कहा कि विकासशील देशों की वित्तीय, प्रौद्योगिकी और अन्य संसाधनों से सहायता की जानी चाहिए, ताकि वे अनुकूलन की भारी चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो सकें।
दुनिया के संघर्षग्रस्त इलाकों में शांति कायम करने के प्रयासों के बारे में कृष्णा ने अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा कायम रखने की पिछले पांच दशकों की भारतीय प्रतिबद्धता को दोहराया। भारत ने इस दौरान 100,000 शांतिरक्षकों का योगदान दिया और इन दशकों के दौरान सबसे अधिक नुकसान उठाया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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