दुनिया के नेताओं ने जी-20 के भविष्य के लिए प्रतिबद्धता जताई (राउंडअप)
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की मेजबानी में पेंसिलवानिया के पिट्सबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के प्रथम दिन लिया गया।
जर्मन सरकार के अधिकारियों के अनुसार नेताओं ने एक ऐसे समझौते की घोषणा की तैयारी की है जो बैंक बोनसों पर प्रतिबंध लगाएगा। इसके साथ ही जो बैंक नए नियमों का पालन नहीं करेंगे उनके ऊपर संभवत: जुर्माना भी लगाया जाएगा। यूरोपीय संघ की यह एक प्रमुख मांग रही है।
वित्तीय संकट के मद्देनजर नेताओं ने बैंकों के लिए पूंजी मानकों पर नए अंतर्राष्ट्रीय नियमों के संकल्प की भी उम्मीद लगा रखी है।
जी-8 की जगह जी-20 जैसा कदम खासतौर से भारत, चीन, ब्राजील और अन्य विकासशील देशों के प्रभाव को अंगीकार करने के लिए उठाया गया है।
यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की खास पहल पर उठाया गया है। जी-20 अब प्रभावी रूप से जी-8 का स्थान ले लेगा। हालांकि जी-8 प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर लगातार बैठकें करता रहेगा, लेकिन उसका बहुत प्रभाव नहीं होगा।
इस अवसर पर भारत को खास महत्व देते हुए ओबामा ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नवंबर में होने वाले वाशिंगटन दौरे का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों अनुसार मनमोहन सिंह का यह दौरा नए अमेरिकी प्रशासन के दौरान किसी वैश्विक नेता का पहला दौरा होगा।
सिंह के साथ गए अधिकारियों ने कहा है कि ओबामा ने जी-20 शिखर सम्मेलन में शुक्रवार को मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर का स्वागत करते हुए कहा कि वह उनकी वाशिंगटन यात्रा का इंतजार कर रहे हैं।
सम्मेलन में ईरान का परमाणु मसला भी खास तौर से चर्चा का विषय रहा। ईरान द्वारा दूसरे यूरेनियम संवर्धन संयंत्र का खुलासा किए जाने के बाद ओबामा ने गहरी निराशा जताई।
ओबामा ने कहा कि नए संयंत्र का आकार ईरान के उस दावे के विपरीत है, जिसमें उसकी ओर से कहा गया है कि इस संयंत्र का उपयोग असैन्य परमाणु बिजली पैदा करने में किया जा रहा है।
ओबामा ने कहा है कि दूसरे परमाणु संयंत्र की परेशान करने वाली खबर से यह साबित होता है कि तेहरान दुनिया को धोखा देना चाहता है और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करना चाहता है।
आईएईए की ओर से शुक्रवार को इस बात की पुष्टि की गई है कि ईरान ने सोमवार को भेजे एक पत्र में वर्षो से छुपा कर रखे गए एक अन्य संयंत्र के बारे में खुलासा किया है।
ओबामा ने कहा है, "इस संयंत्र की उपस्थिति से यह स्पष्ट होता है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मसौदे के तहत अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभाना चाहता।"
इस अवसर पर फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने कहा कि दिसंबर तक ईरान को अपनी परमाणु गतिविधियों के बारे में स्पष्ट करना होगा, अन्यथा उसे नए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना होगा।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन ने कहा कि यदि ईरान जल्द ही अपने को अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अधीन नहीं कर देता तो उसके खिलाफ कई सारे प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे।
अभी तक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ईरान के नतांज यूरेनियम संवर्धन संयंत्र के बारे में ही जानता था और पश्चिमी देशों को आशंका है कि एक दिन इस संयंत्र का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में काम आने वाली सामग्री तैयार करने में किया जाएगा।
हालांकि अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी को दी गई सूचना में यह नहीं बताया गया है कि नया संयंत्र कहां स्थित है और इसके निर्माण में कितनी प्रगति हो चुकी है।
एक अनाम सूत्र ने ईरान की समाचार एजेंसी आईएसएनए से बातचीत में दूसरे यूरेनियम संवर्धन संयंत्र की मौजूदगी की पुष्टि की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications