जी 20 : भारत ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्थान सुनिश्चित कराया (लीड-2)

पिट्सबर्ग, 26 सितम्बर (आईएएनएस)। वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में भारत सहित अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा स्थान प्राप्त होना जी-20 शिखर सम्मेलन में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की एक स्पष्ट जीत है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दो दिवसीय मुहिम का समापन हुआ है।

प्रधानमंत्री ने विकसित दुनिया को यह भी समझाने की कोशिश की है कि खासतौर से विकासशील व गरीब अर्थव्यवस्था वाले देशों को मदद पहुंचाने के निमित्त जारी किए जाने वाले राहत पैकेजों को समाप्त करने का समय अभी नहीं आया है।

ज्ञात हो कि दुनिया के 20 ताकतवर देशों के संगठन जी-20 के नेताओं ने वैश्विक आर्थिक संकट से उबरने के लिए अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करते रहने और वित्तीय तंत्र की स्थिरता के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए जी-20 को एक शीर्ष फोरम बनाने का फैसला किया गया है।

दो दिवसीय जी-20 सम्मेलन के अंत में दुनिया के आठ अमीर देशों के संगठन जी-8 की जगह जी-20 को देने का फैसला भारत, चीन, ब्राजील और तेजी से विकास कर रहे अन्य देशों के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को स्पष्ट करता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय 'व्हाइट हाउस' से जारी एक बयान के अनुसार, "विकासशील देशों को बातचीत की मेज पर लाने का फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत, अधिक संतुलित बनाने, वैश्विक वित्तीय तंत्र में सुधार और गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए किया गया है।"

दुनिया के कुल आर्थिक उत्पादन में 90 फीसदी योगदान देने वाले देशों के इस समूह ने शुक्रवार को वित्तीय कंपनियों को सहारा देने और जोखिम से बचने के मकसद से एक कानून बनाने और लागू करने की समय सीमा निर्धारित करने के प्रति भी प्रतिबद्धता जताई है।

जी-20 सम्मेलन संपन्न होने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हम वैश्विक अर्थव्यवस्था को उबारने में सफल रहे हैं। हमने दीर्घकालीन समृद्धि के लिए काम करने की एक रूपरेखा तैयार की है। हमें पता है कि अभी इस दिशा में काफी काम करना है।"

सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान से राज्य की नीति के एक औजार के रूप में आतंकवाद का प्रयोग बंद करने के साथ मुंबई हमले की साजिश रचने वालों को कानून के कठघरे में खड़ा करने को कहा।

सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पारित प्रस्ताव में ऐसी कोई मांग नहीं की गई है।

यहां जी-20 सम्मेलन के संपन्न होने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले साल मुंबई हमले में पाकिस्तानी नागरिकों के शामिल होने के बारे में पर्याप्त सबूत इस्लामाबाद को दिए जा चुके हैं।

उन्होने कहा, "हमें उम्मीद है कि वे जांच का काम निष्पक्षता से करेंगे और हमलों की साजिश रचने वालों को कानून के कठघरे में खड़ा करेंगे।"

मनमोहन सिंह ने कहा कि शर्म-अल-शेख में पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के साथ बातचीत के बाद से पाकिस्तान को लेकर भारत के रुख में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

एक अन्य सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी देशों से एनपीटी पर हस्ताक्षर करने का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आह्वान का लक्ष्य भारत नहीं है।

उन्होंने कहा, "हमें आश्वस्त किया गया है कि यह प्रस्ताव भारत को निर्देशित नहीं है और अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाएगा।"

प्रधानमंत्री ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के फैसलों के लिए जी-20 को प्रमुख मंच बनाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे तेजी से विकास कर रहे देशों का रुख अब अधिक प्रभावी होगा।

सिंह ने एक अन्य सवाल पर कहा कि अफगानिस्तान की जनता के साथ-साथ यूरोप और अमेरिका के नेताओं ने भी अफगानिस्तान में भारत की भूमिका की सराहना की है। भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में सहयोग के लिए 1.5 अरब डॉलर खर्च किया है।

एक अमेरिकी जनरल द्वारा अफगानिस्तान में बढ़ते भारतीय प्रभाव से क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका जताने के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, "हमने किसी हथियार की आपूर्ति नहीं की। हम निर्माण में उनकी मदद करने के साथ ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्त उपलब्ध करा रहे हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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