जी-20 : प्रधानमंत्री ने कहा, आतंकवाद की नीति छोड़े पाक (लीड-1)
पिट्सबर्ग, 26 सितम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान से राज्य की नीति के एक औजार के रूप में आतंकवाद का प्रयोग बंद करने के साथ मुंबई में आतंकी हमलों की साजिश रचने वालों को कानून के कठघरे में खड़ा करने को कहा।
उन्होंने साथ ही यह स्पष्ट किया भारत परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करेगा और न ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पारित प्रस्ताव में ऐसी कोई मांग की गई है।
यहां जी-20 सम्मेलन के संपन्न होने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले साल मुंबई पर हुए आतंकवादी हमलों में पाकिस्तानी नागरिकों के शामिल होने के बारे में पर्याप्त सबूत इस्लामाबाद को दिए जा चुके हैं।
उन्होने कहा, "हमें उम्मीद है कि वे जांच का काम निष्पक्षता से करेंगे और हमलों की साजिश रचने वालों को कानून के कठघरे में खड़ा करेंगे। अगर ऐसा होता है तो हम संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।"
उन्होंने कहा, "एक ही बाधा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य की नीति के रूप में इस्तेमाल करना छोड़ दे। मुंबई हमलों में अपने नागरिकों के शामिल होने की बात पाकिस्तान पहले ही स्वीकार कर चुका है।"
मनमोहन सिंह ने कहा कि शर्म-अल-शेख में पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के साथ बातचीत के बाद से पाकिस्तान को लेकर भारत के रुख में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत और पाकिस्तान पड़ोसी हैं और एक पड़ोसी की तरह रहना दोनों का उत्तरदायित्व है।
एक अन्य सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी देशों से एनपीटी पर हस्ताक्षर करने का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आह्वान का लक्ष्य भारत नहीं है और अमेरिका ने असैन्य परमाणु समझौते के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया है।
उन्होंने कहा, "हमें आश्वस्त किया गया है कि यह प्रस्ताव भारत को निर्देशित नहीं है और अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। अमेरिकी सरकार के अधिकारियों ने हमें आश्वस्त किया है कि दोनों देशों के बीच जो समझौता हुआ है वह अप्रभावित रहेगा।"
बहरहाल, प्रधानमंत्री ने कहा कि एनपीटी पर हस्ताक्षर करने वाले ईरान को अपनी सभी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए और समझौते में हासिल सभी अधिकारों का लाभ उठाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के फैसलों के लिए जी-20 को प्रमुख मंच बनाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे तेजी से विकास कर रहे देशों का रुख अब अधिक प्रभावी होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के सबसे धनी देशों का संगठन जी-8 सभी वैश्विक मुद्दों से निपटने में सक्षम नहीं था।
उन्होंने कहा कि वैश्विक दुनिया में परस्पर निर्भरता का अर्थ यह है कि कोई भी देश चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो आर्थिक समायोजन और आर्थिक निर्णय प्रक्रिया का संपूर्ण बोझ नहीं उठा सकता।
उन्होंने एक अन्य सवाल पर कहा कि अफगानिस्तान की जनता के साथ-साथ यूरोप और अमेरिका के नेताओं ने भी अफगानिस्तान में भारत की भूमिका की सराहना की है। भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में सहयोग के लिए 1.5 अरब डॉलर खर्च किया है।
एक अमेरिकी जनरल द्वारा अफगानिस्तान में बढ़ते भारतीय प्रभाव से क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका जताने के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, "हमने किसी हथियार की आपूर्ति नहीं की। हम निर्माण में उनकी मदद करने के साथ ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्त उपलब्ध करा रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications