तिब्बती पदयात्रियों ने बोधगया में दलाई लामा के लिए प्रार्थना की
इन पदयात्रियों ने अपनी यात्रा का उद्देश्य तिब्बतियों के धर्म गुरू दलाई लामा के दीर्घायु होने, समस्त प्राणियों की सुख-शांति और अपने पूर्वजों का ऋण चुकाना बताया। इन तीन बौद्घ श्रद्घालुओं में 56 वर्षीय केल्संग डेन्डुप, उनकी 62 वर्षीय पत्नी संजय डोल्मा तथा 43 वर्षीय तिब्बती लामा छुल्टिम हैं।
डेन्डुप ने बोधगया में पत्रकारों के साथ चर्चा में बताया कि महात्मा बुद्घ के प्रति सच्ची श्रद्घा ही हमें यहां तक खींच लाई। उन्होंने कहा कि लगभग चार हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा में उन्हें करीब पांच माह का समय लग गया और वे गुरूवार को यहां पहुंचे। वे बताते हैं कि इसके पूर्व भी वे नवंबर 2007 में बोधगया आ चुके हैं।
उन्होंने अगली बार फिर से पदयात्रा की इच्छा जताते हुए कहा कि पदयात्रा के दौरान नेपाल तथा चीन में कई स्थानों पर सुरक्षा बलों तथा सैनिकों द्वारा जांच-पड़ताल की गई परंतु भारत में केवल सीमा पर ही सैनिकों द्वारा जांच पड़ताल की गई।
पेशे से पशुपालक डेन्डुप बताते हैं कि रास्ते में लोगों ने काफी सहयोग दिया। पदयात्री तिब्बत के आम्डो से ल्हासा होते हुए नेपाल के काठमांडु पहुंचे, और फिर भारत की सीमा में प्रवेश कर बोधगया पहुंचे।
डेन्डुप बताते हैं कि वे राजगीर और नालंदा के बाद हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला जाएंगे और दलाई लामा के दर्शन कर लौट जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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