चीन 1962 को नहीं दोहरा सकता : सीमावर्ती ग्रामीण

तवांग (अरूणाचल प्रदेश), 26 सितम्बर (आईएएनएस)। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान 11 वर्ष के रहे सेवांग लामा को भरोसा है कि चीन उस घटना को अब दोहरा नहीं सकता।

चीन की सेना उस समय अरूणाचल प्रदेश में काफी भीतर तक घुसकर भारी संख्या में भारतीय सैनिकों को हताहत करने में सफल रही थी।

पेशे से व्यापारी और तीन बच्चों के पिता 58 वर्षीय लामा ने आईएएनएस से कहा, "अब के हालात 1962 से भिन्न हैं जब चीन ने हमारे बेखबर सैनिकों को नुकसान पहुंचा दिया था। आज मुझे भरोसा है कि भारतीय सेना चीन के किसी भी गलत मंसूबे का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम होगी।"

लामा के जहन में उस लड़ाई की चंद धुंधली यादें आज भी जिंदा हैं। उनके पिता ने चीनी सैनिकों से बचने के लिए पूरे परिवार को दूसरे गांव में भेज दिया था।

लामा की तरह ही एक अन्य ग्रामीण 63 वर्षीय तामदिंग सरवांग के जहन में भी उन दिनों की कुछ कड़वी यादे जिंदा हैं।

करीब 14,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित सेला दर्रे के समीप के याक पालन का रोजगार करने वाले सरवांग ने कहा, "इतिहास में जो कुछ हुआ, चीन 1962 के घटनाक्रम को दोहरा नहीं सकता। अरूणाचल प्रदेश के लोग भारतीय सेना के साथ हैं और अपने देश की रक्षा के लिए खून बहाएंगे।"

स्थानीय लोगों की इच्छा है कि चीन के खिलाफ भारत कड़ा रुख अपनाए और अलगाव की किसी भी आशंका को खत्म करने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र का विकास करे।

अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोर्जी खांडू भी यही राय है। मुख्यमंत्री ने आईएएनएस से कहा, "अरूणाचल प्रदेश पर चीन का दावा आधारहीन है। इसलिए भारत को एक बार सभी सीमा विवाद निपटाकर सभी संदेहों को दूर करना चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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