चीन के एलएसी को न मामने से सीमा विवाद : राजू
रितु शर्मा
लेह, 26 सितम्बर (आईएएनएस)। रक्षा राज्य मंत्री एम.एम. पल्लम राजू ने कहा है कि चीन के वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को नहीं मानने के कारण दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर भिन्न धारणाएं हैं। उन्होंने कहा कि चीन से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।
जम्मू और कश्मीर के लद्दाख जिले में एक सम्मेलन के दौरान राजू ने शुक्रवार को आईएएनएस से कहा, "जब तक सीमा विवाद सुलझ नहीं जाता, चीन द्वारा इस मुद्दे को बढ़ाने की आशंका है।"
राजू ने संवाददाताओं से कहा, "मैकमोहन रेखा को चीन मान्यता नहीं देता। इसलिए वे उस क्षेत्र में गश्त करते हैं, जिसे वे अपना समझते हैं और हम उस इलाके में गश्त करते हैं जिसे हम अपना समझते हैं।"
मीडिया में चीनी सेना के भारतीय इलाके में घुसपैठ की खबरों के बाद मंत्री सीमावर्ती इलाके के दौरे पर हैं। इन खबरों का भारत और चीन दोनों ने ही खंडन किया है।
राजू ने यह भी कहा कि भारत चीन से खतरे की आशंका को कम करके नहीं आंक रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत-चीन व्यापार तेजी से बढ़ रहा है और आपसी संबंधों में इस पर मुख्य जोर है। परंतु खतरे की आशंका को कम नहीं आंका जा रहा है। भारत की ओर से जो भी तैयारी की जानी चाहिए उसे अंजाम दिया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि इस वर्ष हुई घुसपैठों की संख्या पिछले वर्ष के समान ही है, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।
बहरहाल उन्होंने स्वीकार किया कि एलएसी पर चीनी क्षेत्र की तुलना में भारतीय क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं की हालत खराब है और इसकी लंबे समय तक उपेक्षा हुई है।
मंत्री ने दावा किया कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना को चीन से बढ़त हासिल है,जो ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के वास्ते बीजिंग के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत के पड़ोसी देशों-पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार और बांग्लादेश में कई बंदरगाहों के निर्माण में चीन के भारी निवेश से हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रुचि प्रदर्शित होती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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