बुद्धिमान बच्चा चाहिए तो उसे थप्पड़ न लगाइए
न्यू हेम्पशर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मुरे स्ट्रॉस के मुताबिक बच्चों को शारीरिक दंड देना बेहद तनावपूर्ण होता है। यह उनमें गंभीर तनाव का कारण बन सकता है।
स्ट्रॉस ने कहा, "सभी अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चे तेज हों। शोध से पता चला है कि बच्चों के गलत व्यवहार को सुधारने के लिए थप्पड़ लगाने की बजाए अन्य तरीके अपनाने से मदद मिल सकती है।"
स्ट्रॉस ने पाया कि अमेरिका में जिन बच्चों को शारीरिक दंड दिया जाता है उनका आईक्यू सामान्य बच्चों जिन्हें शारीरिक दंड नहीं दिया गया से कम होता है।
'पेसिफिक इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड इवैल्यूएशन' के वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक मेली पास्कल और स्ट्रॉस ने दो से चार वर्ष के 806 बच्चों और पांच से नौ वर्ष के 704 बच्चों पर शोध किया था। दोनों समूहों के बच्चों का आईक्यू चार वर्ष बाद जांचा गया।
दो से चार वर्ष की आयु समूह के थप्पड़ न खाने वाले बच्चों का आईक्यू चार साल पहले थप्पड़ खाने वाले बच्चों से पांच प्वाइंट अधिक था।
पांच से नौ वर्ष के समूह के थप्पड़ न खाने वाले बच्चों का आईक्यू चार साल पहले थप्पड़ खाने वाले बच्चों से 2.8 प्वाइंट अधिक था।
स्ट्रॉस ने कहा, "अभिभावक अपने बच्चों को कितनी बार शारीरिक दंड देते हैं इससे भी आईक्यू पर असर होता है। बहुत अधिक थप्पड़ लगाने से बच्चों की मानसिक योग्यता का विकास धीमा हो सकता है। लेकिन कम थप्पड़ों का भी मानसिक योग्यता पर असर होता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications