चांद पर पानी से उसकी उत्पत्ति को लेकर नए सवाल :नासा
वाशिंगटन, 25 सितम्बर (आईएएनएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि चांद पर पानी की खोज से उसकी उत्पत्ति और उस पर खनिज पदार्थो के प्रभाव को लेकर नए सवाल खड़े हो गए है।
भारत के पहले चंद्रमिशन 'चंद्रयान-1' के एक उपकरण के हवाले से चंद्रमा पर पानी होने की पुष्टि हुई है। चंद्रयान अपने साथ अमेरिकी उपकरण मून मिनरोलॉजी मैप्पर यानी 'एम 3' भी लेकर गया था, इन्हीं उपकरणों के माध्यम चांद के सतह पर पानी के सबूत मिले हैं।
वाशिंगटन में नासा के मुख्यालय में स्थित ग्रह विज्ञान विभाग के निदेशक जिम ग्रीन ने कहा, " चांद पर पानी की मौजूदगी लंबे अर्से से वैज्ञानिकों के लिए महत्वाकांक्षी खोज रही है। यह आश्चर्यजनक खोज नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद (इसरो) के सहयोग से संभव हुई है।"
ग्रीन ने कहा, "जब हम कहते हैं चांद पर पानी है तो हम झरने, समुद्र या तालाब की बात नहीं करते हैं। चांद पर पानी का अर्थ अणु से है। "
अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग के वैज्ञानिक रॉजर क्लार्क ने कहा आप चांद की सतह के एक टन हिस्से से 32 आउंस पानी निकाल सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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