एमआईपी ने खोजा चांद पर पानी : इसरो
नायर ने कहा कि चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी का पता लगाकर देश के पहले चंद्र अभियान ने एक 'महत्वपूर्ण खोज' की है। उन्होंने कहा कि चांद पर पानी समुद्र, झरना, तलाब या बूंदों की तरह नहीं, बल्कि यह खनिज और चट्टानों की सतह पर मौजूद है।
एमआईपी के अलावा अमेरिकी उपकरण मून मिनरोलॉजी मैप्पर यानी 'एम 3' ने भी चांद पर जल होने की पुष्टि की है। यह उपकरण चंद्रयान-1 के साथ था।
'एम 3' चंद्रयान में शामिल 11 वैज्ञानिक उपकरणों में एक था। चंद्रयान को 22 अक्टबूर 2008 को श्री हरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था लेकिन अगस्त 2009 में चंद्रयान का नियंत्रण कक्ष से रेडियो संपर्क टूट गया था और इसके साथ यह मिशन समाप्त हो गया।
नायर ने कहा कि चंद्रयान-1 ने अपेक्षा से अधिक खोज की है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-1 से अलग होकर चंद्रमा की सतह पर उतरे एमआईपी ने वहां पानी के अंश होने के संकेत ग्रहण किए हैं।
नायर ने कहा, "चंद्रयान-1 का मुख्य उदेश्यों में से एक चांद पर पानी की खोज भी था। हमारे एमआईपी ने इसकी पुष्टि कर दी।" उन्होंने कहा कि जून में ही इसरो को इस संबंध में सूचना मिल गई थी लेकिन वे इंतजार कर रहे थे कि यह पहले किसी वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हो।
नायर ने कहा कि चंद्रयान-1 से एकत्र किए गए आंकड़ों का विश्लेषण करने में छह माह से तीन वर्ष का समय लग सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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