बांग्लादेशी संविधान में व्यापक बदलाव की योजना
कानून मंत्री शफीक अहमद ने गुरुवार को ऐलान किया कि 15 संशोधनों के जरिए ये बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ये बदलाव 'जनभावना' के मुताबिक ही किए जाएंगे।
संविधान में परिवर्तनों से जुड़ा एक मसौदा विधि आयोग को भेज दिया गया है। आयोग इस बात का अध्ययन करेगा कि कैसे संविधान को नवीन बनाया जाए और इसकी कुछ 'विकृतियों' को दूर किया जाएगा।
स्थानीय समाचार पत्र 'न्यू एज' के मुताबिक बांग्लादेशी संविधान के राष्ट्रवाद के मूलभूत सिद्धांत में धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद निहित थे। परंतु वर्ष 1979 में संविधान से समाजवाद के सिद्धांत को हटा दिया गया और इसकी प्रस्तावना में 'बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम' जोड़ दिया गया था।
अहमद ने कहा कि सुशासन और लोकतंत्र की खातिर संविधान में इसके मूल प्रावधानों को फिर से शामिल किए जाने की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications