रबी अभियान के लिए राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का शुभारंभ
पवार ने गुरुवार को यहां रबी अभियान पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि रबी अभियान पर शीघ्र बैठक से खरीफ -2009 की आंशिक असफलता से उत्पन्न प्रतिकूल स्थिति के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए पहले से ही जरूरी उपायों की रूपरेखा तैयार करने का अवसर मिल जाएगा।
पवार ने कहा कि सरकार खरीफ की फसल पर बड़ी गहराई से निगरानी कर रही है तथा राज्यों के साथ संपर्क में रहकर यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि एक निश्चित सीमा तक खड़ी फसल बच जाए। किसानों को वैकल्पिक आपात फसल के लिए पूरी सहायता दी जा रही है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिला स्तर पर फसलों का उचित और सही मूल्यांकन किया जाए ताकि किसानों की आय को प्रभावित होने से बचाया जा सके तथा जहां कहीं ऐसी स्थिति हो, वहां किसानों को खरीफ एवं रबी सीजनों के बीच उगाई जाने वाली फसलों जैसे दाल, बाजरा, मक्का, आलू आदि की खेती के लिए प्रेरित कर उनकी खरीफ फसल में नुकसान की भरपाई की जाए।
उन्होंने कहा कि निम्न एवं अनियमित मानसून से देश में खासकर उत्तर पश्चिम और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में 60 हेक्टेयर धान क्षेत्र में बीज नहीं बोए जा सके तथा 12 लाख हेक्टेयर तिलहन क्षेत्र में फसल नहीं लगाई जा सकी। उन्होंने सलाह दी कि पूर्वी भारत के राज्यों खासकर असम, पश्चिम बंगाल और बिहार खरीफ मौसम में धान की फसल के नुकसान की भरपाई के लिए गर्मियों में लगाई जाने वाली धान की किस्म को अधिकाधिक क्षेत्र में लगाएं।
मंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर किसानों को फसल उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रावों से बचाने के लिए बीजों की उष्मारोधी किस्में दी जाएं। सचिव (कृषि एवं सहयोग) टी़ नंद कुमार ने राज्यों को परामर्श पत्र के ब्योरे से अवगत कराया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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