'चंद्रयान-1' ने चांद पर पानी खोजा (राउंडअप)

वरिष्ठ अमेरिकी वैज्ञानिक कार्ल पीटर्स ने गुरुवार को चंद्रमा पर पानी की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-1 के साथ भेजे गए अमेरिकी अंतरिक्ष विज्ञान एजेंसी (नासा) के उपकरण मून मिनरोलॉजी मैपर यानी 'एम 3' के अनुसार चांद पर जल है।

पीटर्स ने चांद पर जल की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए इसे प्रमुख खोज बताया। उन्होंने इसका श्रेय भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद (इसरो) को देते हुए कहा, "यदि यह इसरो के साथ नहीं होता तो हम यह खोज करने में असमर्थ होते।"

'एम 3' चंद्रयान में शामिल 11 वैज्ञानिक उपकरणों में एक था। चंद्रयान को 22 अक्टबूर 2008 को श्री हरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था लेकिन अगस्त 2009 में चंद्रयान का नियंत्रण कक्ष से रेडियो संपर्क टूट गया था और इसके साथ यह मिशन समाप्त हो गया।

इससे पहले बुधवार को इसरो के प्रमुख जी. माधवन नायर ने कहा था कि वह फिलहाल चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी की पुष्टि नहीं कर सकते।

बुधवार को श्री हरिकोटा में 16वें दूर संवेदी उपग्रह ओसनसेट-2 और छह छोटे यूरोपीय उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण के बाद नायर ने संवाददाताओं से कहा,"चंद्रमा की सतह पर 97 फीसदी खनिज पदार्थ हैं। इस सप्ताह के अंत से पहले मैं चंद्रमा पर पानी होने की बात की पुष्टि नहीं कर सकता।"

इसरो प्रमुख ने कहा कि जहां तक इसरो का प्रश्न है, चंद्रयान उसके लिए 100 फीसदी सफल रहा है। उन्होंने कहा "इसरो चंद्रयान द्वारा भेजे गए आंकड़ों का अध्ययन कर रहा है। अब हम चंद्रयान-2 मिशन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसका 2012 या 2013 में प्रक्षेपण किया जाएगा।"

चांद पर जल की मौजूदगी से वैज्ञानिकों के समक्ष कई सवाल खड़े हो गए हैं, मसलन वहां पानी के अणु कहां से आए और वे कहां जा रहे हैं।

नासा के एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक अमिताभ घोष ने कहा, "यह बहुत अहम खोज है। यदि किसी भी तरह चांद पर पानी का पता चला है तो हम उस पानी का प्रयोग कर सकते हैं, हम उसे निकाल सकते हैं। फिलहाल हम यह नहीं जानते कि उसका तापमान कितना है और क्या वहां उसे निकालना किफायती साबित होगा।"

देश के पहले चंद्रमिशन 'चंद्रयान-1' के परियोजना निदेशक और वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक एम.अन्नादुरई ने चांद पर पानी के प्रमाण मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि हमारे 'बच्चे' ने चांद पर पानी खोज कर अपना काम पूरा कर लिया है।

अन्नादुरई ने गुरुवार को आईएएनएस से कहा, "चांद पर पानी खोजने में मदद कर बच्चे ने अपना काम पूरा कर लिया है।" उन्होंने कहा कि चांद पर पानी का प्रमाण मिलना एक 'बड़ी खोज' है।

अन्नादुरई ने कहा, "यह मील के पत्थरों में एक है। यह टीम के संयुक्त प्रयास का नतीजा है। चांद पर पानी या बर्फ की मौजूदगी का पता लगाना मिशन के प्रमुख वैज्ञानिक उद्देश्यों में से एक था।" उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में चंद्रयान-1 की और खोजों के बारे में रिपोर्ट प्रकाशित होगी।

चंद्रयान पर पांच भारतीय और छह विदेशी उपकरण थे, जिसमें दो नासा के, तीन यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और एक बुल्गारिया का था।

नासा के अंतरिक्ष यान कैसिनी पर मौजूद विजुअल एंड इंफ्रारेड मैपिंग स्केटोमीटर(वीआईएमएस) और अंतरिक्ष यान 'ईपीओएक्सआई' के हाई-रेसोल्यूशन इंफ्रारेड इमेजिंग स्पेक्टोमीटर ने भी चांद पर पानी मिलने के प्रमाण की पुष्टि की है।

अन्नादुरई ने कहा कि चंद्रयान से जुड़ी और जानकारी सामने आएगी क्योंकि इसके साथ 11 उपकरण थे। उन्होंने कहा, "हम अगले कुछ हफ्तों या महीने में और जानकारी की आशा करते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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