चिमनी के मलबे में दबे मजदूरों को बचाने का कार्य जोरों पर (राउंडअप)
बाल्को नगर(छत्तीसगढ़), 24 सितम्बर (आईएएनएस)। यहां स्थित भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बाल्को) संयंत्र की 100 मीटर ऊंची निर्माणाधीन चिमनी के ढहने के बाद उसके मलबे में अभी भी करीब 50 श्रमिकों के फंसे होने की आशंका है और उन्हें निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। बुधवार को हुए इस हादसे के बाद अब तक 22 शव बरामद हो चुके हैं।
मजदूरों ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है।
कोरबा के जिला अधिकारी अशोक अग्रवाल ने आईएएनएस को बताया कि निर्माणाधीन बिजली संयंत्र की चिमनी के मलबे को पूरी तरह हटाने के बाद मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
उन्होंने मलबे में लगभग 50 श्रमिकों के फंसे होने की आशंका व्यक्त की है। इनमें अधिकांश बिहार और झारखंड के हैं।
मुख्यमंत्री रमन सिंह भी राहत कार्यो का जायजा लेने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे। श्रमिकों ने उनके समक्ष बाल्को प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और सीबीआई जांच की मांग की।
सिंह ने मलबे में फंसे लोगों की संख्या पर अटकल लगाने से इंकार कर दिया।
घटनास्थल के समीप सिंह ने पत्रकारों से कहा कि चिमनी दुर्घटना की न्यायिक जांच का आदेश दे दिया गया है। उन्होंने मजदूरों को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बचाव कार्यो पर नजर रखने के लिए राज्य के वरिष्ठ मंत्री बृजमोहन अग्रवाल घटनास्थल पर मौजूद हैं। उन्होंने मलबे में फंसे लोगों की संख्या पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, हालांकि उन्होंने कहा कि दर्जनों श्रमिक लापता हैं।
अग्रवाल ने आईएएनएस से कहा, "बाल्को प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। दोषियों को दंड दिया जाएगा, लेकिन अभी हमारा पूरा ध्यान बचाव कार्य पर है।"
अग्रवाल ने कहा, "1200 मेगावाट के बिजली संयंत्र की 275 मीटर ऊंची चिमनी के निर्माण के लिए गैनन डंकेरली एंड कंपनी लिमिटेड (जीडीसीएल) द्वारा नियुक्त दर्जनों श्रमिक और कैंटीन व स्टोर रूम में मौजूद दर्जनों लोग लापता हैं।"
गुरुवार की सुबह महिलाओं सहित बड़ी संख्या में लोग दुर्घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने इस हादसे के लिए पूरी तरह से बाल्को के प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया।
हादसे में घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती एक मजूदर दयाराम ने आईएएनएस से कहा, "काफी तेज आवाज हुई। एक क्षण के लिए मैंने सोचा कि शायद बिजली गिरी है, क्योंकि उस वक्त काफी तेज बारिश हो रही थी। लेकिन तुरंत मालूम हुआ कि वह तो चिमनी थी जो ढह गई।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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