भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं 'पटन देवी'
मान्यता है कि जो भक्त सच्चे दिल से यहां आकर मां की अराधना करते हैं उनकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। मंदिर के महंत विजय शंकर गिरी बताते हैं कि यहां वैदिक और तांत्रिक विधि से पूजा होती है।
वैदिक पूजा सार्वजनिक होती है, जबकि तांत्रिक पूजा मात्र आठ-दस मिनट की होती है लेकिन इस मौके पर विधान के अनुसार भगवती का पट बंद रहता है। गिरी बताते हैं कि यहां सती की दाहिना जांघ गिरी थी, इस कारण यह शक्ति पीठों में एक है।
गिरी के अनुसार नवरात्र में यहां महानिशा पूजा का सबसे अधिक महत्व है। उन्होंने कहा कि पटन देवी ग्राम देवी के रूप में यहां पूजित हैं। मान्यता के मुताबिक मंदिर के पीछे एक बहुत बड़ा गड्ढ़ा है, जिसे 'पटनदेवी खंदा' कहा जाता है। मान्यता है कि यहीं से निकालकर देवी की तीन मूर्तियों को मंदिर में स्थापित किया गया थ। यहां महाकाली, महासरस्वती तथा महालक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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