ओशनसेट-2 और 6 यूरोपीय उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण (राउंडअप)

श्रीहरिकोटा, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। भारत ने बुधवार को 16वें दूर-संवेदी उपग्रह ओसनसेट-2 तथा छह छोटे यूरोपीय उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया। इन उपग्रहों को उनकी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया। इनसे महासागरों और जलवायु के अध्ययन में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर मौजूद उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने इसरो की टीम को इस कामयाबी के लिए बधाई दी।

प्रक्षेपण के दौरान आसमान साफ था। 44.4 मीटर लंबा और 230 टन का भारतीय रॉकेट ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) चेन्नई से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित प्रक्षेपण स्थल से सुबह 11.51 बजे छोड़ा गया। पीएसएलवी अपने साथ 960 किलोग्राम भार का ओसनसेट-2 और 20 किलोग्राम भार वाले छह नैनो उपग्रह ले गया है।

यह प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा 20 सितम्बर 1993 में प्रथम पीएसएलवी का प्रक्षेपण किए जाने के ठीक 16 वर्ष बाद संपन्न कराया गया है। प्रथम मिशन नाकाम रहा था।

सफल प्रक्षेपण के बाद इसरो प्रमुख जी. माधवन नायर ने मुस्कराते हुए संवाददाताओं से कहा, "यह हमारे लिए बेहद खुशनुमा दोपहरी है। पीएसएलवी शराब की तरह से है जो समय गुजरने के साथ-साथ बेहतर होता जा रहा है।"

सबसे पहले पीएसएलवी ने ओशनसेट-2 को धरती से 728 किलोमीटर की ऊंचाई पर सूर्य-स्थैतिक कक्षा में स्थापित किया और उसके बाद क्यूबसेट्स नाम के चार नैनो उपग्रहों को। इनमें से प्रत्येक उपग्रह का वजन एक-एक किलोग्राम है। बचे हुए दोनों उपग्रह रॉकेट के चौथे चरण से संबद्ध हैं। इन दोनों का वजन आठ-आठ किलोग्राम है।

छह नैनो उपग्रह यूरोपीय विश्वविद्यालयों के हैं। इनमें से चार जर्मनी के तथा एक-एक स्विट्जरलैंड तथा तुर्की का है। इन्हें वाणिज्यिक समझौते के तहत छोड़ा गया।

उपग्रहों के कक्षा में स्थापित होते ही इसरो के उपग्रह निगरानी केंद्रों ने उन पर नजर रखनी शुरू कर दी। वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई और इसरो प्रमुख जी. माधवन नायर ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा, "उपग्रहों को निश्चित कक्षा में स्थापित कर दिया गया है।"

नायर ने कहा, "गुजरते समय के साथ पीएसएलवी के प्रक्षेपण का क्रम बेहतर हुआ है। प्रति वर्ष एक प्रक्षेपण से बढ़कर आज हम सालाना औसतन दो प्रक्षेपण कर रहे हैं। इस वर्ष प्रक्षेपणों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।"

इसी साल इसरो ने 650 किलोग्राम का दूर संवेदी उपग्रह काटरेसेट पीएसएलवी के माध्यम से और जी सेट-4 भू स्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) द्वारा प्रक्षेपित किया।

इसरो उपग्रह केंद्र के निदेशक टी.के. एलेक्स के अनुसार, "सौर पैनल योजना के मुताबिक लगाए जा चुके हैं। अंटार्कटिका और अन्य स्थानों पर हमारे स्टेशनों ने उपग्रह से आंकड़े लेना प्रारंभ कर दिया है।"

ओशनसेट-2 के प्रक्षेपण के साथ ही इसरो द्वारा कक्षा में स्थापित किए गए दूर-संवेदी उपग्रहों की संख्या 10 हो गई है।

उधर अपने पहले उपग्रह के सफल प्रक्षेपण से प्रसन्न स्विटजरलैंड अपने दूसरे क्यूबसेट को भी भारतीय भूमि से प्रक्षेपित करना चाहता है। यह उपग्रह स्विटजरलैंड में अभी निर्माण की प्रक्रिया में है।

स्विटजरलैंड दूतावास में शिक्षा व अनुसंधान सचिवालय की कार्यकारी निदेशक सिल्वा होस्टेटलर ने यहां आईएएनएस से कहा, "यह हमारा पहला उपग्रह है और इसके सफल प्रक्षेपण से हम प्रसन्न हैं। इस उपग्रह को स्विटजरलैंड में एक शैक्षणिक संस्थान द्वारा 400,000 यूरो की लागत से निर्मित किया गया था।"

होस्टेटलर यहां स्विटजरलैंड द्वारा निर्मित और उसके स्वामित्व वाले क्यूबसेट के प्रक्षेपण के मौके पर गवाह के रूप में आई हुई थीं। इस उपग्रह को भारत के ओसनसेट-2 पर आरोपित कर भारतीय रॉकेट पीएसएलवी से प्रक्षेपित किया गया।

होस्टेटलर के अनुसार ठीक इसी आकार का (एक किलोग्राम का) एक दूसरा उपग्रह भी स्विटजरलैंड में एक शैक्षणिक संस्थान द्वारा विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "भारत व स्विटजरलैंड ने 61 साल पहले एक मित्रता संधि पर हस्ताक्षर किया था। अब इस प्रक्षेपण से हमारी मित्रता मजबूत हुई है।"

ज्ञात हो कि भारत ने बुधवार को अपने 16वें सुदूर संवेदी उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। 160 करोड़ रुपये की लागत वाले ओसनसेट-2 नामक इस उपग्रह के जरिए समुद्र और जलवायु का अध्ययन किया जाएगा। यूरोप निर्मित छह छोटे उपग्रह भी इस उपग्रह पर आरोपित कर एक रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किए गए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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