अफगानिस्तान की समस्या का सैन्य समाधान संभव नहीं : कृष्णा (रांउडअप)

वाशिंगटन, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान में शीर्ष अमेरिकी कमांडर द्वारा नई दिल्ली की भूमिका को लेकर सवाल खड़ा करने के बीच भारत ने कहा है कि उस देश की समस्या का सैन्य समाधान संभव नहीं है और नाटो के नेतृत्व में चलाए जा रहे ऑपरेशन को राजनीतिक समाधान का रास्ता खोजना चाहिए।

भारत ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और तालिबान के बीच रिश्तों को लेकर चेतावनी भी दी और कहा कि अफगानिस्तान का पुनर्निर्माण उसकी मुख्य चिंता है।

मंगलवार को न्यूयार्क में समाचार पत्र 'वाल स्ट्रीट जर्नल' को दिए एक साक्षात्कार में विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने कहा, "भारत यह नहीं मानता कि लड़ाई किसी भी समस्या का समाधान है और यह बात अफगानिस्तान पर भी लागू होती है।"

उन्होंने कहा, "मैं सोचता हूं कि वहां की समस्या का एक राजनीतिक समाधान हो सकता है और हमें उस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "भारत एक आशावादी राष्ट्र है। हम मानते हैं कि समाधान निकल सकता है। यदि ब्रिटेश, जिसने सदियों तक हमारे ऊपर शासन किया, के साथ भारत बेहतर संबंध बना सकता है, तो इससे पता चलता है कि हम अफगानिस्तान की समस्या का समाधान भी ढूंढ़ सकते हैं।"

कृष्णा का यह बयान उस वक्त आया है जब अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो के शीर्ष कमांडर जनरल स्टेनली ए. मैकक्रिस्टल ने एक गोपनीय रिपोर्ट में और सुरक्षा बलों की जरूरत बताई है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर अगले साल तक और सुरक्षा बल मुहैया नहीं करवाए गए तो आठ वर्षो से जारी ऑपरेशन विफल साबित हो सकता है।

मैकक्रिस्टल ने 30 अगस्त को रक्षा मंत्री रॉबर्ट एम. गेट्स को अपनी रिपोर्ट भेजी थी। इस बारे में समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट ने खबर प्रकाशित की है।

मैकक्रिस्टल ने रिपोर्ट में यह भी कहा है भारत का अफगानिस्तान में बढ़ता प्रभाव क्षेत्र में तनाव बढ़ाने के साथ पाकिस्तान को अफगानिस्तान या भारत में जवाबी कार्रवाई के लिए उकसा सकता है। हालांकि उन्होंने माना है कि अफगानिस्तान में भारत की गतिविधियों से अफगानिस्तान के लोग बड़े पैमाने पर लाभान्वित हो रहे हैं।

कृष्णा ने मैकक्रिस्टल के इन सुझावों को खारिज करते हुए उनके आरोपों को आधारहीन बताया।

यद्यपि मैकक्रिस्टल ने कहा, "बड़े पैमाने पर विकास कार्यक्रमों और वित्तीय निवेश के कारण अफगानिस्तान में भारत का राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ रहा है। इसके अलावा अफगानिस्तान की मौजूदा सरकार को इस्लामाबाद में भारत समर्थक के रूप में देखा जा रहा है।"

भारत ने पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए अफगानिस्तान को 1.2 अरब डॉलर की मदद दी है। इसके अलावा भारत वहां बुनियादी ढांचा तैयार करने से जुड़ी कई परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है।

कृष्णा ने कहा कि तालिबानी आतंकवाद में पाकिस्तान की बाधक भूमिका और उसकी खुफिया एजेंसी द्वारा अफगानी तालिबान को पहुंचाई गई मदद से अफगानिस्तान की सैन्य स्थिति जटिल हो गई है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार खुफिया एजेंसी आईएसआई और अफगान तालिबान के बीच गठजोड़ तोड़ने में विफल रही है और वे अभी तक साथ-साथ हैं।

उन्होंने कहा कि हाल में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा आतंकवाद से मुकाबले के लिए मिलने वाली अमेरिकी सहायता के अन्य मदों में इस्तेमाल होने संबंधी बयान से भारत की बात को समर्थन मिला है।

कृष्णा ने कहा, "हम हमेशा ही अपने मित्रों, खासकर अमेरिका को आगाह करते रहे हैं कि कृपया वह यह सुिनश्चित करे कि उसके द्वारा पाकिस्तान को दी जा रही सहायता का इस्तेमाल आपके मित्र (भारत) के खिलाफ न हो।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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