बढ़ रहा है डिमेन्शिया का दायरा

बढ़ रहा है डिमेन्शिया का दायरा

नए शोध से पता चला है कि दुनियाभर में डिमेन्शिया से प्रभावित लोगों की संख्या तीन करोड़ 50 लाख तक पहुँच गई है. ये संख्या पहले किए गए आकलन से दोगुनी है.

डिमेन्शिया लोगों को दिमाग़ी रूप से तबाह कर देती है. शोध से यह भी पता चला है कि इस बीमारी से प्रभावित लोगों में से दो तिहाई विकासशील देशों में रहते हैं.

रिपोर्ट की मानें तो आने वाले वर्षों में दक्षिण एशिया में भी इस बीमारी से प्रभावित लोगों की संख्या में काफ़ी बढ़ोत्तरी होगी.

भारत में अल्ज़ाइमर्स एंड रिलेटेड डिसऑर्डर्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के नेशनल चेयरमैन डॉक्टर के जैकब रॉय का कहना है कि अभी भारत में 30 लाख से ज़्यादा लोग डिमेन्शिया और अल्ज़ाइमर्स से प्रभावित है. वर्ष 2025 तक ये संख्या बढ़कर 60 लाख तक पहुँच जाएगी.

डिमेन्शिया उन लोगों को ज़्यादा प्रभावित करती है, जिनकी उम्र 65 वर्ष से ज़्यादा होती है.

अल्ज़ाइमर डिजीज इंटरनेशनल के इस शोध में यह भी आकलन है कि अगले 20 वर्षों में डिमेन्शिया से प्रभावित लोगों की संख्या क़रीब-क़रीब दोगुनी हो जाएगी.

शोध करने वालों ने स्थिति को काफ़ी गंभीर बताया है और कहा है कि सरकारें इससे निपटने के लिए तैयार नहीं हैं.

मोटापा, कोलेस्टेरॉल और डायबिटीज़ और उम्र के कारण डिमेन्शिया का ख़तरा बढ़ जाता है.

नए आँकड़ों के मुताबिक़ वर्ष 2050 तक दुनियाभर में डिमेन्शिया से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 11 करोड़ 50 लाख हो जाएगी.

इस रिपोर्ट के मुताबिक़ डिमेन्शिया लोगों को हृदय रोग और कैंसर से भी ज़्यादा प्रभावित करती है.

बीबीसी के साथ बातचीत में रिपोर्ट तैयार करने वाले लंदन के प्रोफ़ेसर मार्टिन प्रिंस ने कहा कि विकासशील देश इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं.

उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि ये बहुत गंभीर समस्या है. दुनियाभर में निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए ये स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक मुद्दा भी है. इस समय महत्व के हिसाब से यह मुद्दा ऐसा है, जिसकी पूरी तरह अनदेखी की गई है. ज़्यादातर लोग इसे मुख्य रूप से धनी पश्चिमी देशों की बीमारी मानते हैं. लेकिन सच्चाई ये है कि डिमेन्शिया से प्रभावित लोगों में से दो तिहाई दुनिया से ग़रीब देशों में रहते हैं."

अमरीका में हर साल 315 अरब डॉलर इस बीमारी पर ख़र्च होता है और ये ख़र्च आने वाले वर्षों में और बढ़ने ही संभावना है.

रिपोर्ट तैयार करने वालों का कहना है कि अगर इस बीमारी की अनदेखी की गई तो इसका असर पीड़ितों, परिवारों, स्वास्थ्य सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा.

शोधकर्ताओं ने सरकारों से तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है और कहा है कि सरकारें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के साथ मिलकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में डिमेन्शिया को प्राथमिकता दें.

आंकड़ों के मुताबिक़ डिमेन्शिया से प्रभावित लोगों में से 5.65 प्रतिशत लोग दक्षिण एशिया में रहते हैं. और अगले 20 वर्षों में दक्षिण एशिया में डिमेन्शिया से प्रभावित लोगों की संख्या में 134 से 146 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होगी.

फ़िलहाल डिमेन्शिया से प्रभावित लोगों में से 5.58 प्रतिशत लोग निम्न और मध्य आय वर्ग के हैं और वर्ष 2050 तक ये हिस्सा 71 प्रतिशत तक हो जाएगा.

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