जलवायु परिवर्तन के लिए खर्च करना दान नहीं है : संयुक्त राष्ट्र
ब्यूनस आयर्स, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए किया गया कोई भी खर्च दान का काम नहीं, बल्कि कर्तव्य है। अगर अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी इस कर्तव्य में पीछे रह जाती है तो दुनिया का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। यह राय संयुक्त राष्ट्र संघ की है।
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार यूएन कनवेंशन टू कॉम्बैट डिजर्टीफिकेशन (यूएनसीसीडी) के प्रमुख ने कहा कि अगर दुनिया यह समझती है कि जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए खर्च करना दान का काम है तो वह गलत है। यह वैश्विक चुनौती है। सोमवार से यहां शुरू हुए नौवें यूएनसीसीडी सम्मेलन में इसके कार्यकारी सचिव लक जकाजा ने कहा, "अगर हम जलवायु परिवर्तन के खतरे की गंभीरता को समझ नहीं पाए तो हमारा साझा भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।"
जलवायु परिवर्तन के कारण मरुस्थलीय दायरे में हो रहे इजाफे से जुड़ी वैश्विक चिंता इस सम्मेलन के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि बंजर एवं रेतीली जमीन को खेती योग्य बनाया जा सकता है, बशर्ते कि जलवायु परिवर्तन के खतरे से पुख्ता तरीके से निपटा जाए।
12 दिवसीय इस सम्मेलन में 2000 से ज्यादा प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। इसमें 191 देशों के प्रतिनिधियों के अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसियों के अधिकारी भी भाग ले रहे हैं। दुनिया भर के गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी इसमें शिरकत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी जिम्मेवारी है जिसकी ओर से मुंह नहीं फेरा जा सकता। जकाजा ने कहा, "दशकों पहले के पारिस्थितिकीय हालात को लौटाने के अलावा हमारे सामना दूसरा कोई चारा नहीं है। यह हर किसी की जिम्मेवारी है।"
उन्होंने कहा कि दुनिया को यह समझना होगा कि मिट्टी बेहद महत्वपूर्ण संसाधन है। इसे क्षरण से बचाकर ही हम धरती पर अपने भविष्य की रक्षा कर सकते हैं। जकाजा ने कहा, "मृदा संरक्षण का मतलब है धरती पर जीवन का संरक्षण।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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