भारतीय वास्तुकला की स्थिति अच्छी नहीं : बॉबी मुखर्जी

दिल्ली, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। मशहूर वास्तुकार बॉबी मुखर्जी मानते हैं कि स्वतंत्रता के बाद से भारतीय वास्तुकला की स्थिति ऐसी नहीं है जिस पर हम गर्व कर सकें।

मुखर्जी ने आईएएनएस से कहा, "हम लोगों को ऐतिहासक स्मारकों और वास्तुकला से परिचित कराते हैं लेकिन स्वतंत्रता के बाद से हमने कुछ खास नहीं गढ़ा है। अब भी हम मुगल काल के स्मारकों से पश्चिम को लुभाने की कोशिश करते हैं।" उन्होंने कहा कि वह आज के लिए कुछ करना चाहते हैं।

मुखर्जी महाराष्ट्र के लोनावाला में एंबी वैली की उत्कृष्ट योजना प्रस्तुत कर अपनी विशिष्ट वास्तुशैली का परिचय दे चुके हैं। 10,000 एकड़ भू-भाग पर फैली एंबी वैली में विलासितापूर्ण जीवन जीने के सभी साधन मौजूद हैं। 1998 से 2003 के बीच इसने आकार लिया था।

साक्षात्कार के दौरान मुखर्जी ने कहा, "यह बहुत चुनौतीपूर्ण काम था क्योंकि यहां एक पहाड़ी इलाके को आवासीय क्षेत्र में तब्दील करना था। उस समय गूगल अर्थ जैसी वेबसाइट नहीं थीं इसलिए हमें इलाके के उपग्रह दृश्यों के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) की मदद लेना पड़ी।"

एकेडमी कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर के छात्र रहे मुखर्जी कहते हैं, "दुर्भाग्य से इस समय भारतीय वास्तुकला की स्थिति बहुत खराब है और इसके लिए सभी यहां के शिक्षा तंत्र को दोष दे रहे हैं क्योंकि जो डिजायनिंग पाठ्यक्रम यहां उपलब्ध हैं वे अच्छे नहीं हैं। यह पाठ्क्रम बहुत खर्चीले होते हैं और सभी इतनी महंगी शिक्षा नहीं ले सकते।"

मुखर्जी ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने के लिए देश से बाहर जाकर अच्छा काम सीखना पड़ता है। यहां तब तक अच्छा काम नहीं हो सकता जब तक कि आपके पास देखने के लिए अच्छा वास्तुशिल्प न हो। परेशानी यह है कि हमारे पास इस क्षेत्र में आए नए लोगों को दिखाने के लिए अच्छा वास्तुशिल्प नहीं है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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