मौत का कानूनी हक हासिल करने वाले आस्ट्रेलियाई का निधन
पेशे से शेयर दलाल रहे 49 वर्षीय क्रिश्चियन रोसिटर को पिछले साल लकवा मार गया। शारीरिक हरकतों को जड़ बनाने वाले इस रोग ने उन्हें इतना कष्ट पहुंचाया कि वह ऐसे हालात को "जिंदा नरक" की संज्ञा देने लगे। उनके वकील ने मीडिया को बताया कि रोसिटर ने पूरे साहस से मौत का सामना किया।
रोसिटर पिछले करीब एक साल से पर्थ के एक नर्सिग होम में भर्ती थे। उन्होंने इस घोर त्रासद स्थिति से मुक्ति पाने के लिए अदालत से उन्हें इच्छा मृत्यु का कानूनी हक देने की अपील की थी। अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि नर्सिग होम का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह रोसिटर के आग्रह के मुताबिक उन्हें आहार से वंचित कर दे ताकि रोसिटर अपनी मर्जी से मौत को गले लगा सके। इस फैसले को आस्ट्रेलियाई कानूनी इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है।
डीपीए संवाद एजेंसी ने उनके वकील जॉन हैमंड को यह कहते हुए उद्धृत किेया है, "रोसिटर को एक ऐसे शख्स के रूप में याद किया जाएगा जिसने ऐसे हालात से गुजर रहे लोगों को मौत का कानूनी हक दिलाने के लिए जंग लड़ी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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