पीएसएलवी में तरल ईंधन भरा जा रहा है

वेंकटाचारी जगन्नाथन

चेन्नई, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। 70 करोड़ रुपए की लागत वाले ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान(पीएसएलवी) रॉकेट में तरल ईंधन भरने काम सुचारू ढंग से जारी है। यह रॉकेट 130 करोड़ की लागत वाले भारतीय दूर संवेदी उपग्रह ओशनसैट 2 के अलावा छह लघु उपग्रहों को भी कक्षा में स्थापित करेगा।

बुधवार दोपहर को पीएसएलवी को यहां से करीब 80 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र से छोड़ा जाएगा। इस यान के प्रक्षेपण के लिए 51 घंटों की उलटी गिनती सोमवार सुबह 9 बजे से शुरू हो गई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) में प्रकाशन एवं जन संपर्क विभाग के निदेशक एस.सतीश ने बेंगलुरु से फोन पर आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "चार चरणों वाले इस रॉकेट में ठोस एवं तरल दोनों तरह के ईंधन का इस्तेमाल होता है। प्रथम तीन चरणों में ठोस ईंधन का इस्तेमाल होता है, जबकि चौथे चरण में तरल ईंधन इस्तेमाल किया जाता है।"

तरल ईंधन भरने का काम प्रक्षेपण से दो दिन पहले पूरा किया जाना है। उनके मुताबिक दूसरे चरण में 41.5 टन ईंधन भरने में करीब 10 घंटे लगते हैं। दूसरे चरण का ईंधन 147 सेकंड जलेगा और अधिकतम 799 किलो न्यूटन(केएन) प्रणोद(थ्रस्ट) पैदा करेगा। प्रथम चरण का ईंधन 101 सेकंड तक जलकर 4,817 केएन प्रणोद पैदा करेगा। तीसरे चरण का ईंधन 112 सेकंड तक जलकर 238 केएन प्रणोद पैदा करेगा, जबकि अंतिम चरण का तरल ईंधन 497 सेकंड तक जलकर 14.6 केएन प्रणोद पैदा करेगा।

उन्होंने बताया कि बुधवार को यह रॉकेट सुबह 11.51 बजे छोड़ा जाएगा। पीएसएलवी छह लघु यूरोपीय उपग्रहों को भी कक्षा में स्थापित करेगा। इससे भारत को अच्छी कमाई होगी। भारतीय उपग्रह को धरती से 720 किलोमीटर ऊपर सूर्य-स्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा। दूर संवेदी आंकड़ों को जुटाने वाले शीर्ष देशों की सूची में शामिल भारत अभी तक 15 दूर संवेदी उपग्रह छोड़ चुका है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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