बुंदेलखंड में टायरों से किया गया अंतिम संस्कार
खजुराहो निवासी दीना रैकवार अपने परिवार के साथ मजदूरी करने छतरपुर आया हुआ था। वह रोजी-रोटी का इंतजाम तो वह नहीं कर पाया लेकिन उसकी तबियत जरूर बिगड़ गई। दीना की तबियत बिगड़ी तो परिवार के लिए उसका इलाज कराना मुश्किल हो गया। तमाम प्रयासों के बावजूद शनिवार को दीना की मौत हो गई। दीना की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार करना परिवार के लिए समस्या बन गया।
दीना के बेटे बलराम रैकवार ने बताया कि उसने कंधा देने के लिए किसी तरह तीन लोगों का इंतजाम किया और अपने पिता के पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक ले गया। वह अंतिम संस्कार के लिए साइकिल के टायर भी ले गया था क्योंकि लकड़ी के लिए उसके पास पैसा नहीं था। उसे श्मशान घाट में लकड़ी उपलब्ध कराई गई लेकिन वह पर्याप्त नहीं थी, इसलिए उसे टायरों की मदद से अपने पिता का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
उधर, नगर पालिका के उपाध्यक्ष श्रीराम गुप्ता ने बताया कि दीना के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी उपलब्ध कराई गई थी।
बलराम ने बताया कि उसके पास न तो गरीबी रेखा का कार्ड है और न ही उसे सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उसे तो खाने के लिए कुछ लोगों ने अनाज भी दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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