बेंगलुरु में बुनियादी ढांचे सुधारने के लिए पीपीपी मॉडल पर जोर
बेंगलुरु, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। ऐसे में जब बारिश ने बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे की खामियां उजागर कर दी हैं, स्थानीय निवासी एवं विशेषज्ञ इसे सुधारने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी(पीपीपी) मॉडल को अपनाने पर जोर दे रहे हैं।
बारिश के इस मौसम में शहर की यातायात व्यवस्था अराजक हो गई है, वहीं शहर के एक उफनते नाले में एक और बच्चे के डूबने की घटना ने बुनियादी ढांचे की कमियां उजागर कर दी हैं।
निष्क्रिय हो चुके एक संगठन बंगलौर एजेंडा टास्क फोर्स(बीएटीएफ) के पूर्व सदस्य वी. रविचंदर ने इस संवददाता से बातचीत करते हुए कहा, "शहर के बुनियादी ढांचे को सुधारना सरकार और जनता दोनों की जिम्मेवारी है। मेरा मानना है कि इसके लिए पीपीपी मॉडल अपनाया जाना चाहिए।"
कई पॉश कालोनियों एवं प्रमुख आईटी कंपनियों के कार्यालयों वाले दक्षिण बेंगलुरु में पिछले सप्ताह 30 मिलीमीटर बारिश के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई। कुछ इलाकों में तो तीन घंटे से अधिक समय के लिए यातायात ठप हो गया। शहर के नाले बारिश के पानी की निकासी में अक्षम साबित हुए। ऐसे में कई इलाकों में बाढ़ का नजारा पैदा हो गया।
पिछले सप्ताह एक बच्चे के उफनते नाले में गिरकर मरने की घटना ने भी शहर के बुनियादी ढांचे की खामियां उजागर कर दी हैं। पेशे से साफ्टवेयर इंजीनियर अयान खान कहते हैं, "देश की आईटी राजधानी के लिए यह शर्म की बात है कि मासूम बच्चे यहां के असुरक्षित नालों में गिरकर मर रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए पीपीपी मॉडल अपनाए जाने की जरूरत है, क्योंकि सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं है।"
लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए काम करने वाले एक संगठन जनाग्रह के एक अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, "सरकार और जनता दोनों के नजरिए में बदलाव की जरूरत है। सरकार के अलावा निजी क्षेत्र को भी सुविधाओं के विकास में भूमिका निभाने का मौका मिलना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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