भारत के पास पर्याप्त परमाणु क्षमता है : नारायणन (लीड-1)

नारायणन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से चिंतित भारत अपने परमाणु समझौतों को प्रभावित नहीं होने देने के लिए ब्रिटेन, रूस और फ्रांस के संपर्क में है। नारायणन ने कहा कि उन्हें इसका भय सताता रहता है कि मुंबई हमले की कहीं पुनरावृत्ति न हो जाए। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि भारत ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

नारायणन ने समाचार चैनल सीएनबीसी-टीवी18' पर एक साक्षात्कार में कहा, "हमारे पास पर्याप्त परमाणु क्षमता है। मैं इस बारे में पूरी तरह से आश्वस्त हूं। अगर हमारे देश पर परमाणु हमला होता है तो हमारे पास भी जवाब देने के लिए पर्याप्त क्षमता रहेगी।"

पोखरण परमाणु परीक्षण की सफलता पर उठे सवालों के बाद यह पहला मौका है जब किसी सरकारी अधिकारी ने इस बारे में बयान दिया है।

गौरतलब है कि डीआरडीओ के पूर्व अधिकारी के. संथानम ने भारत द्वारा 1998 में किए गए परमाणु परीक्षण की सफलता पर संदेह जताया था।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि परमाणु ऊर्जा आयोग ने पिछले सप्ताह 1998 के परमाणु परीक्षण की क्षमता पर स्थिति साफ कर दी थी और इससे ज्यादा सरकार की ओर से किसी स्पष्टीकरण की जरूरत नहीं है।

नारायणन ने संकेत किया कि संथानम और अन्य वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिकों का बयान वैज्ञानिक समुदाय में व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का परिणाम हो सकता है।

उन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षण की समीक्षा के लिए वैज्ञानिकों का पैनल नियुक्त करने के सुझाव को यह कह कर खारिज कर दिया कि मामले की जांच के लिए तटस्थ और स्वतंत्र वैज्ञनिकों का मिलना मुश्किल होगा।

नारायणन ने कहा कि वह इन खबरों से वाकिफ हैं कि पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत भी अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक होने पर परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने से नहीं हिचकिचाएगा।

मुंबई हमले की पुनरावृत्ति का भय :

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम. के. नारायणन ने कहा है कि उन्हें प्रतिदिन यह भय सताता रहता है कि गत 26 नवम्बर को हुए मुंबई हमले की कहीं पुनरावृत्ति न हो जाए। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि भारत इससे निपटने को पूरी तरह तैयार है।

नारायणन ने जमात-उद-दावा के मुखिया और मुंबई हमलों के मुख्य आरोपी हाफिज सईद के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा दर्ज की गई दो प्राथमिकियों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।

मुंबई हमले की पुनरावृत्ति होने की आशंकाओं की गंभीरता पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में नारायणन ने कहा, "आप ऐसा सवाल पूछ रहे हैं जिसे लेकर मैं प्रतिदिन भयभीत रहता हूं। इस मसले को या तो मैं या फिर केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम देखते हैं।"

उन्होंने कहा, "गृह मंत्री प्रतिदिन सुरक्षा संबंधी एक बैठक लेते हैं जिसमें मैं भी रहता हूं। इसमें कई खुफिया जानकारियां सामने आती हैं। यह कहना मुश्किल है कि मुंबई जैसे हमले हो सकते हैं या नहीं, लेकिन जहां तक मैं मानता हूं हम इस बार बेहतर ढंग से इसका सामना करने को तैयार हैं।"

यह पूछे जाने पर कि क्या पाकिस्तान को लेकर भी उन्हें भय लगा रहता है, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "पाकिस्तान से नहीं, लेकिन पाकिस्तान की कुछ गतिविधियों से जरूर भयभीत होता हूं क्योंकि उसकी गतिविधियां हमारे लिए मुश्किलें ही पैदा करती है।"

गौरतलब है कि हाफिज सईद पर की गई पाकिस्तान पुलिस की कार्रवाई का जहां चिदम्बरम ने स्वागत किया था, वहीं नारायणन ने कहा कि इससे पाकिस्तान की कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता को लेकर विश्वसनीयता नहीं बढ़ने वाली है।

भारत एनपीटी, सीटीबीटी पर ब्रिटेन, फ्रांस, रूस के संपर्क में :

नारायणन ने कहा कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि (सीटीबीटी) पर सभी देशों से हस्ताक्षर करने का आग्रह करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से चिंतित भारत अपने परमाणु समझौतों को प्रभावित नहीं होने देने के लिए ब्रिटेन, रूस और फ्रांस के संपर्क में है।

इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की अध्यक्षता में इस हफ्ते होने वाले सुरक्षा परिषद के विशेष सत्र के दौरान पारित होने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा, "हम उन देशों के साथ वार्ता कर रहे हैं जिनके साथ हमारा समझौता हुआ है, जैसे फ्रांस। हम ब्रिटेन से भी वार्ता कर रहे हैं, जिसके साथ एक समझौते के लिए सौदेबाजी हो रही है और हम एक या दो दिन में रूस से भी बात करेंगे।"

अमेरिकी समाचार पत्र 'पोलिटिको' की वेबसाइट पर प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव में एनपीटी में गर शामिल सभी देशों से संधि में गैर परमाणु हथियार राष्ट्र के रूप में शामिल होने को कहा गया है। इसमें परमाणु परीक्षण से बचने के लिए सीटीबीटी में भी शामिल होने के लिए कहा गया है, जिससे संधि को यथासंभव शीघ्र तिथि से लागू किया जा सके।

नारायणन ने कहा कि वह प्रस्तावित प्रस्ताव से चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा जैसे देश भारत के साथ द्विपक्षीय परमाणु समझौता करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि प्रस्ताव कोई बाधा नहीं है।

नारायणन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ अगले सप्ताह होने वाली वार्ता में यह मुद्दा उठ सकता है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अमेरिका के साथ पहले भी उठ चुका है और इस प्रस्ताव से भारत और अमेरिका के बीच हुए परमाणु समझौते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि विदेश सचिव निरुपमा राव ने शनिवार को कहा था कि भारत नि:शस्त्रीकरण और इस मुद्दे पर वैश्विक सहमति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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