चीनी घुसपैठ के सवाल पर सरकार में मतभेद
नई दिल्ली, 20 सितम्बर (आईएएनएस)। चीनी घुसपैठ की खबरों को केंद्र सरकार एक तरफ जहां यह कहकर खारिज कर रही है कि स्थिति चिंताजनक नहीं है वहीं रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना है कि सरकार चीनी खतरे को नजरअंदाज कर रही है।
इन रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार यह मानने को तैयार नहीं है कि चीन ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की है और उसने सीमा पर अपनी गतिविधियां भी तेज कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में देश भर के पुलिस प्रमुखों के साथ प्रधानमंत्री की हुई एक बैठक में रिसर्च एंड एनलिसिस विंग (रॉ) के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा था कि चीनी घुसपैठ को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि चीन भारत को अलग-थलग करने के लिए नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार में भारी निवेश कर रहा है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि चीनी घुसपैठ की खबरों पर क्या और कैसे प्रतिक्रिया की जाए, इसे लेकर विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच समन्वय का अभाव है।
इन सब घटनाओं के मद्देनजर गुरुवार को अधिकारियों की एक शीर्ष स्तरीय बैठक बुलाई गई थी जिसे बाद में स्थगित कर दी गई। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम. के. नारायणन, कैबिनेट सचिव के. एम. चंद्रशेखर, रक्षा सचिव प्रदीप कुमार, गृह सचिव जी. के. पिल्लई, विदेश सचिव निरूपमा राव और तीनों सेनाओं के प्रमुखों को शामिल होना था।
बैठक स्थगित किए जाने का कोई औपचारिक कारण नहीं बताया गया लेकिन सूत्रों की मानें तो तीनों मंत्रालयों के बीच उपजे मतभेदों के कारण यह बैठक स्थगित करनी पड़ी।
विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने कथित चीनी घुसपैठ की खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि इससे बहुत अधिक चिंतित होने की जरूरत नहीं है। दोनों देशों की सीमाओं पर शांति है। जबकि रक्षा मंत्रालय ने सीधे तौर पर चीन पर घुसपैठ का आरोप लगाया था। चीन ने हालांकि इस आरोप का खंडन किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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