फिनलैंड में भिखारियों से निपटने को लेकर बहस

हेल्सिंकी, 20 सितम्बर (आईएएनएस)। हाथ जोड़े और सिर झुकाए 40 वर्षीया इलिश मोल्डोवन हेल्सिंकी की एक भीड़-भाड़ वाली सड़क पर भीख में मिलने वाले चंद सिक्कों का इंतजार कर रही थी। मोल्डोवन उन 100 अप्रवासी रोमानियाई भिखारियों में शामिल है जिन्होंने फिनलैंड में भीख मांगने को गैर कानूनी घोषित करने के मुद्दे पर एक बहस को जन्म दे दिया है।

मोल्डोवन कहती हैं, "रोमानिया में आय का कोई साधन न होने की वजह से मैं एक साल पहले इस शहर में आई थी। मेरे पांच बच्चे हैं जिन्हें भोजन की आवश्यकता है। मैं अपने परिवार के साथ हेल्सिंकी के बाहरी इलाके में एक अस्थाई तम्बू लगाकर रहती हूं।"

हेल्सिंकी के मुख्य बाजारों और रेलवे स्टेशन के आसपास के इलाके में कई भिखारी दिखाई देने लगे हैं।

फिनलैंड की गलियों में भीख मांगती महिलाओं और बच्चों की बढ़ती संख्या को देखकर यहां के निवासी अचंभित हैं क्योंकि दो साल पहले तक इस तकनीकी स्तर पर संपन्न देश में भिखारी नहीं थे। फिनलैंड की जनसंख्या केवल 53 लाख है जो कि दिल्ली की जनसंख्या की केवल एक तिहाई है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक फिनलैंड में करीब 100 भिखारी हैं। इनमें से ज्यादातर भिखारी 2007 में यूरोपीय संघ में शामिल हुए देशों रोमानिया और बुल्गारिया के हैं।

शहर के एक दुकानदार ने बताया, "भीख मांगने को गैर कानूनी करने या सरकार की तरफ से अप्रवासियों को आर्थिक सहायता देने के मुद्दे पर सरकारी व सार्वजनिक स्तर पर चर्चाएं चल रही हैं।"

भिखारियों की बढ़ती संख्या के बीच अधिकारियों ने सरकार से पूछा है कि वह इस मुद्दे से कैसे निपटें जबकि फिनलैंड के कानून के मुताबिक भीख मांगना तब तक कोई अपराध नहीं है जब तक कि इससे कोई अशांति पैदा नहीं होती।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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