गूगल की किताबों पर आपत्ति

अमरीका के न्याय विभाग ने न्यूयार्क की एक अदालत से आग्रह किया है कि इंटरनेट कंपनी गूगल के उस समझौते को क़ानूनी मान्यता न दे जिसके तहत गूगल को लाखों किताबों के प्रकाशन का अधिकार मिल जाएगा.
न्याय विभाग का कहना है कि गूगल के इस समझोते के कारण कॉपीराइट संबंधी कई प्रश्न उठ खड़े हुए हैं इसलिए समझौते के वर्तमान प्रारूप को नामंज़ूर कर दिया जाना चाहिए.
न्यूयॉर्क की अदालत में इस मामले पर अगले माह के शुरू में फ़ैसला सुनाया जाएगा.
इस समझौते के तहत गूगल ने लेखक संघों और कुछ प्रकाशकों को देने के लिए साढ़े 12 करोड़ डॉलर का एक विशेष कोष बनाया है.
साथ ही एक बुक राइट्स रजिस्ट्री अथवा पुस्तक प्रकाशनाधिकार सहिंता बनाई जाएगी ताकि जिन लेखकों की किताबे इंटरनेट पर पढ़ी जाएँगी उन्हें इस कोष से रॉयल्टी दी जा सके.
गूगल ने अंतरराष्ट्रीय लेखक संघ और अमरीकी प्रकाशक संघ के साथ ये समझौता अक्टूबर 2008 में किया था.
हालाँकि गूगल ने इंटरनेट पर किताबों का प्रकाशन पहले ही शुरू कर दिया था लेकिन जब प्रकाशकों और लेखक संघों ने उसे क़ानूनी कार्रवाई की धमकी दी तो उसे इस समझौते के लिए मजबूर होना पड़ा.
उधर गूगल की प्रतिद्वंदी इंटरनेट कंपनियों माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, और याहू ने इस समझौते पर आपत्ति ज़ाहिर की है. ये कंपनियाँ गूगल के एकाधिकार का विरोध कर रही हैं.
अमरीकी न्याय विभाग का कहना है की इस समझौते का स्वरुप इतना बड़ा है कि इसको लेकर कई महत्वपूर्ण क़ानूनी मुद्दे उठ खड़े हुए हैं.
जिस तरह से ये समझौता किया गया है उससे गूगल को उन किताबों के इन्टरनेट प्रकाशन का अधिकार मिल गया है जिनके लेखकों का अब कुछ पता नहीं है.
इसके अलावा दुनिया के अन्य देशों में लेखकों के कॉपीराइट अधिकार कि रक्षा के बारे में में भी साफ़गोई से काम नहीं लिया गया है.
अमरीकी न्याय विभाग की एक और आपत्ति ये भी है कि इस समझौते के तहत इंटरनेट प्रकाशक गूगल को किताबों की क़ीमत तय करने का एकाधिकार मिल जाएगा यानी कि किताबों की प्रतियोगी क़ीमतें तय नहीं की जा सकेंगी.
इसलिए अमरीकी न्याय विभाग ने सिफारिश की है कि वर्तमान स्वरुप में इस समझौते को नामंजूर कर दिया जाना चाहिए और दोनों पार्टियों, यानी कि गूगल और लेखक और प्रकाशक संघों को इसमें सुधार का मौक़ा दिया जाना चाहिए.
उधर अपने एक साझा वक्तव्य में गूगल, लेखक तथा अमरीकी प्रकाशक संघ ने कहा है कि वे न्याय विभाग द्बारा उठाये गए मुद्दों पर विचार कर रहे हैं.
उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की है कि अदालती कार्रवाई के दौरान वे इन मुद्दों का कोई हल निकाल लेंगे.
गूगल का कहना है कि इस समझौते के बाद वो इंटरनेट पर लाखों किताबों का प्रकाशन कर सकेगा और दुनिया के करोड़ों पाठकों ऐसी किताबें उपलब्ध करा सकेगा जो एक लंबे समय से पाठकों के लिए उपलब्ध नहीं रहीं हैं.


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